गृहमंत्री अनिल विज के पास पहुंची एक महिला, बोली- मैंने अपने पति को मारा, मुझे दो फांसी

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Yuva Haryana, Ambala
सोमवार को अंबाला में जब गृहमंत्री अनिल विज अपने आवास पर लोगों की समस्याएं सुन रहे थे, तब अचानक एक महिला आ पहुंची और गृहमंत्री के सामने बोली की मैं अपनी की मौत के लिए जिम्मेदार हूं, मुझे जेल भेजें व फांसी दें।

दरअसल सोमवार को जब अनिल विज शास्त्री कॉलोनी में अपने आवास पर लोगों की समस्याएं सुन रहे थे, तभी एक महिला रोते हुए आई और मंत्री के हाथ में एक पत्र थमा दिय़ा। मंत्री ने जैसे ही पत्र पढ़ा तो वो हैरा रह गए जिसके बाद उन्होने यह पत्र डीएसपी को दे दिया।

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मंत्री ने जब महिला से पूछा कि जो पत्र में लिखा है वो क्या सही है और वो होश में ही लिख रही है क्या.. तो महिला ने कहा कि वो अंदर से टूट चुकी है। महिला ने बताया कि जो मेरे पति की मौत के लिए मैं खुद जिम्मेदार हूं, इसलिए मुझे सजा मिलनी चाहिए।

पुलिस ने जानकारी देते हुए बताया कि पूरी जानकारी जुटाने के बाद बताया कि मृतक रोहताश पुलिस में ईएसआई के पद पर तैनात थे। और साल 2017 में मौत हो गई थी। इस घटना के बाद मौत को असामान्य बताते हुए गांव में ही अंतिम संस्कार कर दिया था।

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पत्र में लिखा- डॉक्टर, वकील, पुलिस सब कहते हैं- ये भगवान की मर्जी थी, पर मैं कहती हूं मेरी गलती है>

अनिल विज सर! मेरा नाम सुनील कुमारी है। मेरे पति पुलिस में थे। उनकी मृत्यु हो चुकी है। घर में लड़ाई रहती थी और मैंने उनको चुन्नी के साथ बांध दिया था, जिससे उनकी मृत्यु हो गई। मैं सदमे में चली गई थी। मुझे नहीं पता था कि ऐसा हो जाएगा। मैंने पुलिस को भी नहीं बताया। डॉक्टर को भी नहीं बताया।

पोस्टमार्टम में भी मौत का कारण गले मे फंसी उल्टी बताया गया। अब मुझे पछतावा है और मुझे तनख्वाह-पेंशन नहीं चाहिए। मैं वापस करना चाहती हूं और मेरी सजा मुझे दे दी जाए। लेकिन मेरी कोई सुनवाई नहीं कर रहा। मैं पागल नहीं हूं। डॉक्टर भी कहते हैं कि तेरी गलती नहीं है भगवान की मर्जी है। वकील से मिली वो भी कह रहे हैं कि भगवान की मर्जी है।

पुलिस से मिली, उन्होंने भी कहा भगवान की मर्जी है। मैं मानती हूं सर गलती तो मेरी ही है। उस दिन मैंने क्यों छिपाया, इसमें पुलिस की कोई गलती नहीं है। अब बच्चे भी मुझे कहते हैं भगवान की मर्जी है, लेकिन सर मेरी हेल्प करो, मैं अपने आप को धोखा नहीं दे सकती। मुझे जेल चाहिए और फांसी चाहिए। सर मेरी हेल्प करे हाथ जोड़ती हूं।’ (जैसा सुनील कुमारी ने गृहमंत्री को दी चिट्ठी में लिखा है)

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