Home Breaking चार दशक बाद हरियाणा को जगी पानी की उम्मीद, आज समझौते पर हस्ताक्षर

चार दशक बाद हरियाणा को जगी पानी की उम्मीद, आज समझौते पर हस्ताक्षर

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Sahab Ram, Yuva Haryana
Chandigarh, 28 August, 2018

लखवार बहुउद्देश्यीय राष्ट्रीय  परियोजना आखिरकार करीब चार दशक बाद सिरे चढने जा रही है. इस परियोजना को लेकर देश के छह राज्यों के मुख्यमंत्री दो दिनों से दिल्ली में है। इस परियोजना को लेकर छह राज्यों के मुख्यमंत्री के समझौते पर हस्ताक्षर किये गए हैं। यहां पर केंद्रीय जल संसाधन मंत्री नितिन गडकरी भी मौजूद रहे।

  • परियोजना से 67 लाख एकड़ फीट पानी का प्रबंधन संभव होगा और सभी राज्यों में पानी और बिजली की उपलब्धता बढ़ेगी।
  • लखवार बांध परियोजना के लिए छह राज्यों में MoU आज साइन किया गया।
  • हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल, उत्तराखंड के त्रिवेंद्र सिंह रावत, उत्तर प्रदेश के योगी आदित्यनाथ, हिमाचल प्रदेश के जयराम ठाकुर, राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल लखवार बहुउद्देश्यीय राष्ट्रीय परियोजना के समझौता पत्र पर हस्ताक्षर करेंगे।
  • उत्तराखंड में देहरादून के लोहारी गांव में बनने वाले इस बांध से 78 मिलियन क्यूसेक मीटर पानी की उपलब्धता होगी जो इन राज्यों में खुशहाली का बैंचमार्क स्थापित करेगा।
  • यमुना नदी पर चार बांध बनाने की दशकों से ठंडे बस्ते में पड़ी परियोजना को बाहर निकालने में केंद्रीय मंत्री गडकरी का अहम रोल रहा।

माना जा रहा है कि इस परियोजना के सिरे चढने से हरियाणा को भी अपने हिस्से का पानी मिलेगा। हरियाणा को 1994 के समझौते के अनुसार पानी मिलेगा।

इस परियोजना का 35 फीसदी से ज्यादा काम पूरा हो चुका है और अब छह राज्यों के मुख्यमंत्री इस परियोजना को सिरे चढ़ाने के लिए एकजुट हो गए हैं। इसकी पहल केंद्रीय जल संसाधन मंत्री नितिन गडकरी ने की है।

लखवार बांध परियोजना से छह राज्यों को 78 मिलियन क्यूसिक मीटर पानी मिलेगा। यह योजना साल 1976 में मंजूर हुई थी उस वक्त 204 मीटर ऊंचाई का बांध बनाने की योजना थी। करीब दस साल बाद 1985 में पर्यावरणीय मंजूरी मिलने के बाद 1987 में जेपी ग्रुप ने उतर प्रदेश सिंचाई विभाग के पर्यवेक्षण में इस डैम का निर्माण कार्य शुरु किया था।

1992 में इस परियोजना का काम 35 फीसदी पूरा हो गया था लेकिन कुछ अड़चनों की वजह से काम रुक गया था जिसके बाद साल 2008 में केंद्र सरकार ने इस परियोजना को राष्ट्रीय परियोजना घोषित कर दिया था जिसके बाद इस परियोजना पर 90 फीसदी धन केंद्र सरकार खर्च करेगी। लेकिन इसके बाद भी यह परियोजना धन के अभाव में लटक गई।

अब एक बार फिर केंद्रीय जल संसाधन मंत्री नितिन गडकरी ने इस परियोजना को सिरे चढाने की योजना बनाई है। देश के छह राज्यों के मुख्यमंत्री इस परियोजना को लेकर दिल्ली पहुंचे हुए हैं।

परियोजना में 1884 हेक्टेयर जमीन का इस्तेमाल होगा जिसमें 467 हेक्टेयर जमीन वन विभाग की है। परियोजना से छह राज्यों में 33,780 हेक्टेयर जमीन की सिंचाई होगी, जबकि 78 मिलियन क्यूसेक मीटर पानी घरेलू और व्यवसायिक उपयोग के लिए उपलब्ध होगा। साढ़े चार साल में पूरी होने वाली परियोजना में 2578 करोड रुपये जल घटक और 1388 करोड़ रुपये बिजली उत्पादन घटक पर खर्च किए जाएंगे। निर्माण की जिम्मेदारी उत्तराखंड जल विद्युत निगम उठाएगा।

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