एंटी माइक्रोबियल साबुन पर रोक लगाने की मांग, शिक्षक ने स्वास्थ्य मंत्री को लिखा पत्र

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बाजार में आमतौर पर बिकने वाले एंटी माइक्रोबियल साबुन को अब बैन करने की मांग उठने लगी है। इसको लेकर महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय के प्राध्यापक डॉ. अनुराग खटकड़ ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री को पत्र लिखकर इस प्रकार को प्रोडेक्ट्स को बैन करने की मांग की है।

एक पत्र के माध्यम से डॉ. खटकड़ ने लिखा है कि साल 2016 में जैसा कि यूएसएफडीए ने 19 वह केमिकल जिन्हें एंटी माइक्रोबियल बताकर साबुन के तौर पर मार्केट में बेचा जा रहा था।। बड़ी बड़ी नामी कंपनियों ने इन केमिकल्स का इस्तेमाल करके सालों से मार्केट से अरबों खरबों की कमाई की और सब को अंधेरे में रखा है कि एंटीमाइक्रोबियल बताये जाने वाले ये साबुन सामान्य किसी साबुन से अलग नहीं थे।

अतः इसी बात को देखते हुए यूएसएफडीए ने 19 एंटी माइक्रोबियल केमिकल्स को साल 2016 में बैन कर दिया है।।

यूएसएफडीए के मुताबिक निम्न दिए गए बिंदुओं के कारण यह 19 केमिकल बैन हुए हैं:

  1. ऐसा कोई वैज्ञानिक तर्क अभी तक सामने नहीं आई है कि यह तथाकथित एंटीबैक्टीरियल साबुन बीमारियों से रोकथाम करने में किसी आम साबुन से बेहतर हों। ना ही आजतक एंटीबैक्टीरियल साबुन को इस्तेमाल करने का कोई अलग से लाभ आज की तारीख तक सामने आया है।
  2. बल्कि लंबे समय तक एंटीबैक्टीरियल साबुन को इस्तेमाल करने से उसके नेगेटिव असर शरीर पर महसूस किए गए हैं।।
  3. वर्ष 2013 में सारे तथ्यों को पढ़कर, समझ कर निष्कर्ष निकालते हुए यूएसएफडीए ने यह प्रस्ताव रखा कि इन्हें इस्तेमाल करने वाले उपभोक्ता या बनाने वाली कंपनियां या कोई और शोधकर्ता इसके लाभ सामने ला सके तो बेहतर होगा।।
  4. लेकिन ऐसी कोई भी लाभ देने वाली जानकारी कंपनियों के द्वारा यूएसएफडीए को उपलब्ध नहीं करवाई गई जिसकी वजह से कंजूमर एंटीसेप्टिक वॉश प्रोडक्ट्स जिनमें कि मुख्य तौर पर triclosan और triclocarban को इस्तेमाल करने वाले प्रोडक्ट मार्केट में नहीं भेजे जा सकते हैं।।
  5. सभी मैनुफैक्चरर्स को 1 साल की अवधि का समय दिया गया था जिसमें कि वह एंटी माइक्रोबियल साबुन को प्लेन साबुन से बेहतर साबित कर सकते थे लेकिन सारी कंपनियां साबित करने में नाकाम रही और हाथ खड़े कर गई।।
  6. यूरोपियन देशों में कुछ कंपनियों ने बैन 19 केमिकल्स को अपने प्रोडक्ट्स से हटाना शुरू कर दिया है क्योंकि वह अब इन प्रोडक्ट्स को बैन लगने के बाद बेच नहीं सकती थी।।
  7. एफडीए के इस बैन में उपभोक्ताओं के द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले एंटीबैक्टीरियल साबुन या बॉडी वाश जिन्हें पानी में इस्तेमाल किया जाता है वही शामिल हैं।

इस प्रकार की साबुन को बैन करने संबंधी रिपोर्ट

इस पत्र में डा़ः अनुराग खटकड़ ने USFDA के उस लिंक को भी साथ में उपलब्ध करवाया है जिसमें कि इस बैन की पुष्टि की गई है।

साथ ही उन्होंने थेरेसा मिशेल जो कि यूएसएफडीए के नॉन प्रेस्क्रिप्शन ड्रग प्रोडक्ट्स में बतौर MD कार्यरत हैं उनके द्वारा दी गई टिप्पणी का उल्लेख किया है:

“मिशेल ने कहा है कि साधारण साबुन और पानी के साथ हाथ धोने से हम गंभीर से गंभीर इन्फेक्शन से अपना बचाव कर सकते हैं, जिसका कि हमारे घर स्कूल या दफ्तर में हमें सामना करना पड़ता है।”

साथ ही साथ मिशेल कहती हैं कि हम इसके अलावा किसी और साबुन को इस्तेमाल करने की सलाह नहीं दे सकते।

इन्हीं बातों का उल्लेख करते हुए डॉ अनुराग ने सरकार से अपील की है के भारत में किसी कानून की गैरहाजिरी में यह कंपनियां धड़ल्ले से अपने सामान को बेच रही हैं और आम लोगों की जेब पर असर डाल रही हैं।। अतः सरकार से यही निवेदन किया गया है कि इस मामले की गंभीरता को देखते हुए कोई गाइड लाइन लागू की जाए जिसके तहत भारत में भी फिजूल में इस्तेमाल होने वाले इन 19 केमिकल्स को बैन किया जा सके और गलत मार्केटिंग के तरीकों पर लगाम लगाई जा सके।

भारत में भी सालों से यह कंपनियां मन लुभाने वाली एडवर्टाइजमेंट TV के माध्यम से या अखबार के माध्यम से प्रकाशित करती रही हैं और लोगों को कहीं ना कहीं गलत जानकारी देकर अपना सामान बेचते रही हैं।

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