रामपाल समेत 15 दोषियों को उम्रकैद की सजा, 1-1 लाख का जुर्माना

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Vinod saini, Yuva Haryana

Hisar, 16 Oct, 2018

बरवाला के सतलोक आश्रम में 14 नवम्बर 2014 को 4 महिला व एक बच्चे की हत्या के केस नम्बर 429 में रामपाल,उसका बेटा विजेंद्र समेत सभी 15 दोषियों को उम्र कैद व सभी पर 1-1लाख जुर्माने की सजा सुनाई गई है।

एक अन्य महिला की हत्या के मामले में 17 को आएगा सजा का फैसला,इस केस में रामपाल समेत 14 है दोषी।

एंकर -अाखिर कौन है रामपाल-
रामपाल का असली नाम रामपाल सिंह जाटिन है और उसका जन्म सोनीपत जिले में गोहना तहसील के धनाना गांव में हुआ था। उसके पिता नंद लाल एक किसान थे और मां इंदिरा देवी एक गृहणी थी। रामपाल ने खुद निलोखेरी आईटीआई से डिप्लोमा लिया और सालों तक हरियाणा सरकार के सिंचाई विभाग में जूनियर इंजीनियर के तौर पर काम भी किया। उन्हीं दिनों में रामपाल सत्संग करने में रूचि लेने लगे और संत रामपाल दास बन गए थे। साल 1996 रामपाल ने अपने अभियंता पद से स्तीफा दे दिया और बाद में करोंथा गांव में सतलोक आश्रम की स्थापना की थी। हालांकि इनके गिरफ्तार होने के बाद आश्रम सरकार के क़ब्ज़े में है। रामपाल ने 1999 में सतलोक आश्रम की स्थापना की। रामपाल के दो लड़के और दो लड़कियां भी हैं।

साल 1999 में हुई सतलोक अाश्रम की स्थापना-
रोहतक के करौंथा गांव में बने सतलोक आश्रम की साल 1999 में हुई थी। संत रामपाल खुद को कबीर पंथ का अनुयायी कहता था। उसके भक्तों के अनुसार वह कबीर का ही अवतार है। रामपाल और कबीर पंथ के लोग मंदिर, मूर्ति पूजा, छुआछूत, व्यभिचार और अभद्र गीत व डांस को भी बुरा मानते हैं।

2014 में रामपाल पर हुए थे 7 केस दर्ज-
रामपाल पर पुलिस ने नवंबर 2014 में सात केस दर्ज किए थे। इसमें देशद्रोह, हत्या, अवैध रूप से सिलेंडर रखने आदि काफी मामले हैं। रामपाल इनमें से दो केसों में बरी हो चुका है। इन दोनों केसों में पुलिस कोई पुख्ता सबूत पेश नहीं कर सकी थी, जिस पर कोर्ट ने भी टिप्पणी की थी। एक मुकदमे से अदालत ने रामपाल का नाम हटा दिया था, वहीं अब रामपाल दो हत्याओं के माले में दोषी करार दिया गया है। इसके बाद भी रामपाल के खिलाफ चल रहे तीन केस लंबित पड़े हैं।

29 लोगों को दोषी करार दिया, जिसमें तीन महिलाएं शामिल-
अदालत ने रामपाल व अन्‍य आरोपिताें को भादसं की धाराओं 302, 343 अौर 120बी के तहत दोषी ठहराया है। अदालत में एफआइआर नंबर 429 के मामले में रामपाल सहित 15 आरोपितों को दोषी करार दिया। वहीं कोर्ट ने एफआइआर नंबर 430 में 14 आरोपितों को दोषी करार दिया थ।

रामपाल पर दर्ज केस
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1- रामपाल सहित अन्यों पर सरकारी डयूटी में बाधा पहुचाने का केस हिसार के बरवाला थाने में दर्ज है।
2 राम सहित चार अन्य पर रास्त अवरुद् कर संगत को बंधक बनाने का केस दर्ज
3 रामपाल सहित 14 पर पुस्तक बांटकर धार्मिक धार्मिक भावनाए भडकाने का केस दर्ज है
4 हिसार के बरवाला आश्रम में भगदड में पाच श्रदालुओं की मौत पर रामपाल और 13 पर हत्य का दूसरा केस दर्ज है।
5 आश्रम में चार सौ गैस सिलेंडर पाए जाने के मामले में आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत केस दर्ज है
6 रामपाल सहित 14 लोगों पर एमपी निवासी रजनकी की आश्रम में मौत के मामले में हत्या का केस दर्ज है।
7 हिसार के बरवाला थाने में रामपाल समेंत 942 लोगों पर देशद्रोह का केस दर्ज है।

विवाद
सन् 2006 में रामपाल के हिसार में सतलोक आश्रम में जमीन को लेकर विवाद हुआ था इस विवाद में एक व्यक्ति की हत्या भी हुई थी , जिसमें रामपाल के विरुद्ध केस चला था। लेकिन इनके समर्थकों ने हिसार कोर्ट में बवाल मचा दिया था जिसके कारण केस को हाईकोर्ट में चलाना पड़ा था। उस वक़्त उच्च न्यायालय के बार – बार बुलाने पर भी रामपाल हाजिर नहीं हुए थे हमेशा बहानेबाजी कर के बचते रहे। एक बार जुलाई 2006 में ग्रामीण लोगों के साथ एक लड़ाई झगड़ा हुआ इस दौरान जब पुलिस रामपाल को गिरफ्तार करने को आई तो इनके हजारों समर्थक आश्रम में जमा हो गए थे और रामपाल तक पुलिस का पहुंचना मुश्किल कर दिया था। इसके बाद सन् 2013 में करोनथा गांव में उनके आश्रम में झड़प हुई थी जिसमें 2 लोगों की जाने गई थी तथा कुछ अन्य लोग भी घायल हुए थे।

रामपाल के एक समर्थक ने कहा था कि बाबा एक चमत्कारी आत्मा है जो धरती पर भगवान का स्वरूप है। कुछ लोग इन्हें फंसा रहे हैं पर हम खड़े रहेंगे जितनी भी गोलिया क्यों न बरसें।

रामपाल के समर्थक-
इनके अलावा इनके समर्थकों ने यह भी बतलाया था कि बाबा तो पशुओं से बातें करते हैं। इनके अलावा रामपाल कई चर्चाओं में भी घिरे रहे। 2006 में स्वामी दयानंद पर एक बयान दिया था इस कारण आर्य समाज के समर्थकों और रामपाल के समर्थकों के बीच आश्रम के बाहर हिंसक वार्ता झड़प हुई थी जिसमें एक महिला की मौत होनी की ख़बरें आई थी। इस मामले में हरियाणा पुलिस ने रामपाल को हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया था जिसके कारण इन्हें तकरीबन 22 महीने तक कारागृह में रहना पड़ा था। 22 महीनों के पश्चात रामपाल को 30 अप्रैल 2008 को पुलिस ने इन्हें रिहा कर दिया था।

कबीरपंथी का चोला पहने लाखों भक्त बनाने वाले बाबा रामपाल महाराज भले सलाखों के पीछे चल गए हैं लेकिन उनके रहस्य की पोल अब खुल रही है।रामपाल को अरेस्ट करने में पुलिस और हरियाणा की बीजेपी सरकार के पसीने छूट गए। बाबा का आश्रम पुलिस और समर्थकों के बीच जंग के मैदान में तब्दील हो गया था। आखिरकार पुलिस को आश्रम में घुसने में कामयाबी मिली और बाबा कानून के शिकंजे में आ गए। जब पत्रकार रामपाल के 12 एकड़ की हवेली में पहुंचे तो उन्हें दांतों तले उंगली दबानी पड़ी। रामपाल को हत्या और राजद्रोह के आरोप में जेल भेज दिया गया है।
संत रामपाल की बाबा बनने की कहानी जितनी दिलचस्प है। उतनी है उनकी गिरफ्तारी के बाद तहखानों से मिली सामग्री भी। जी हां, हत्या के आरोप में रामपाल की गिरफ्तारी के बाद जब सतलोक आश्रम में सर्च अभियान चलाया गया था तो वहां से करोड़ों रुपए की खाद सामग्री मिली थी। जैसे, 7000 किलो देसी घी, 99 कार्टून सरसों का तेल, 186 कार्टून पारले बिस्कुट, 45 कैन सोयाबीन रिफाइंड तेल, 154 कट्टे मिल्क पाउडर, 600 कट्टे आटा और 600 कट्टे चीनी आदि । तलाशी के दौरान पुलिस को कई चौंकाने वाली चीजों का पता चला था। रामपाल का आश्रम किसी फाइव स्टार होटल से कम नहीं था। इसके अंदर स्विमिंग पूल, एलईडी टीवी से लेकर अस्पताल तक थे।
कैमरे का मुंह भी टॉयलेट के अंदर की ओर था-
सर्च के दौरान देशद्रोह व हत्‍या के आरोपी कबीरपंथी बाबा रामपाल के बरवाला (हिसार, हरियाणा) स्थित सतलोक आश्रम में महिला टॉयलेट में सीसीटीवी कैमरा लगा था। इतना ही नहीं, कैमरे का मुंह भी टॉयलेट के अंदर की ओर था। रामपाल खुद सिंहासन पर बैठता था और लिफ्ट से मंच पर प्रकट होता था। 5 लाख रुपए का मसाजर भी उसके कमरे से मिला था। इसके अलावा, कंडोम और अश्लील साहित्य भी बरामद किया गया था।
नरबलि का भी लगा आरोप-
बरवाला के सतलोक आश्रम संचालक रामपाल की मुसीबतें तब और बढ़ गई थी जब हाईकोर्ट में उनके खिलाफ नरबलि का आरोप लगाया गया था। दरअसल, जींद निवासी हरिकेश ने याचिका दायर कर कहा था कि अगस्त 2014 में उनके बेटे का शव आश्रम में मिला था। आशंका है कि उसकी बलि दी गई है, लेकिन पुलिस ने आत्महत्या का केस दर्ज किया था। जिस पर पीडि़त ने सीबीआई जांच की मांग की थी।

गिरफ्तारी से बचने फेंके थे पेट्रोल बम-
गिरफ्तारी से बचने रामपाल और उसके कमांडोज ने तरह-तरह के हथकंडे अपनाए थे, लेकिन बच नहीं पाए। गिरफ्तारी से पहले आश्रम के बाहर हिंसा भड़क उठी थी और रामपाल को गिरफ्तार करने पहुंची पुलिस को समर्थकों व कमांडोज ने फायरिंग कर बाहर ही रोक दिया था। करीब 90 राउंड फायरिंग की गई थी और पेट्रोल बम भी फेंके गए थे। इस हिंसा में लगभग 75 पुलिस कर्मी और 200 से ज्यादा लोग जख्मी हो गए थे। इतना ही नहीं, पांच महिलाओं की मौत का दावा भी किया गया था।

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