पेहवा के पृथुदक तीर्थ में उमड़ी पितरों के निमित तर्पण के लिए भीड़

कला-संस्कृति हरियाणा

Yuva Haryana
(18 March 2018)

चैत्र चौदस के मेले में कुरुक्षेत्र के पिहोवा में लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। श्रद्धालुओं ने अपने पितरों के तर्पण के लिए पूजा पाठ करवाया। कुरुक्षेत्र की 48 कोस की पावन धरा पर स्थित पृथुदक तीर्थ का खास महत्व है। जिसके चलते हर साल यहां मेला लगता है।

कुरुक्षेत्र की परीधि में पड़ने वाले तीर्थों में सबसे ज्यादा महत्व पृथुदक तीर्थ का माना जाता है। वामन पुराण के अनुसार वेन के पुत्र पृथु के नाम से इस तीर्थ का नाम पृथुदक हुआ। राजा वेन धर्म से विमुख हो गया था, जिस कारण ऋषियों ने उसे श्राप देकर मार दिया था। फिर उसके शरीर का मंथन किया गया, जिससे भगवान विष्णु के नौंवें अंश पृथु पैदा हुए।

पुराणों के अनुसार भी कहा जाता है कि पांडवों के बड़े भाई युधिष्ठिर ने महाभारत के युद्ध में मारे गए अपने सगे संबंधियों का यहीं पर पिंड दान करवाया था। भगवान श्री कृष्ण और शिव ने भी यहां सरस्वती तीर्थ में स्नान किया था। साथ ही श्री गुरु नानक देव जी और श्री गुरु गोबिंद सिंह जी भी यहां पधारे थे। महाराजा रणजीत सिंह इसी पावन तीर्थ पर अपनी माता का पिंडदान करवाने आए थे।

इस पावन तीर्थ पर पूरा साल श्रद्धालु पिंडदान और स्नान करने के लिए आते रहते हैं, लेकिन चैत्र चौदस को यहा स्नान करने का विशेष महत्व है।
चैत्र चौदस मेले में श्रद्धालुओं का लगभग 80 प्रतिशत वर्ग सिक्ख समुदाय से आता है। इसलिए इस मेले को हिन्दू-सिक्ख एकता के प्रतीक के रूप में जाना जाता है।

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