सहमति से बना लिव इन पार्टनर के बीच शारीरिक संबंध दुष्कर्म नहीं:सुप्रीम कोर्ट

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Yuva Haryana

Delhi,3 jan.2019

सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि लिव-इन पार्टनर के बीच सहमति से बना शारीरिक संबंध दुष्कर्म नहीं होता है। अगर व्यक्ति अपने नियंत्रण के बाहर की परिस्थितियों के कारण महिला से शादी नहीं कर पाता है,तो ऐसा संबंध बनता है। शीर्ष कोर्ट ने महाराष्ट्र की नर्स द्वारा डॉक्टर के खिलाफ दर्ज कराई गई प्राथमिकी को खारिज करते हुए यह टिप्पणी की। दोनों कुछ समय तक लिव इन पार्टनर थे।

दरअसल न्यायमूर्ति ए के सीकरी और एस अब्दुल नजीर ने हाल के अपने एक फैसले में कहा था कि ऐसे मामलों की  सावधानीपूर्वक जांच होनी चाहिए कि शिकायतकर्ता वास्तव में पीड़ित से शादी करना चाहती है या उसकी नीयत खराब थी। वहीं यह भी देखा जाना चाहिए कि पीड़ित ने महज अपनी इच्छा की पूर्ति के लिए संबंध बनाने को तो महिला को झांसा नहीं दिया था। एफआईआर के मुताबिक नर्स विधवा है और डॉक्टर से प्रेम होने के बाद दानों लिव-इन में रहने लगे थे। कोर्ट ने कहा कि यदि आरोपी की मंशा गलत न हो तो ऐसे मामलों की दुष्कर्म से अलग सुनवाई होनी चाहिए।

साथ ही कहा कि यदि उसने गलत इरादे से संबंध बनाए हों तो वह साफ तौर पर दुष्कर्म का मामला होगा। पीठ ने कहा कि दो पक्षों के बीच सहमति से रिश्ते बनने पर इसे आईपीसी की धारा 376 (दुष्कर्म) के तहत अपराध नहीं माना जाएगा। जब नर्स को पता चला कि डॉक्टर की किसी से शादी हो चुकी है, तब उसने शिकायत दर्ज करवाई।

 

 

 

 

 

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