एमए पास व्यक्ति ने नौकरी करने की बजाय शुरू किया ये काम, अब लाखों में कर रहा हैं कमाई

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Yuva Haryana
Hisar, 10 jan, 2020

हिसार से चंडीगढ़ जाते समय प्रभुवाला गांव के पास आपने देखा होगा कि हाईवे पर कई रेहडिय़ां लगी मिलेगी। यहां पर सीजन के हिसाब से आम, अमरूद, आड़ू व किन्नू की बिक्री की जाती है। इन फलों को उगाने के पीछे जागरूकता व शिक्षा ने अहम योगदान निभाया है। दरअसल प्रभुवाला निवासी 60 वर्षीय राजेंद्र भाटिया 18 एकड़ में सिर्फ बागबानी का काम करते हैं।

बता देें कि राजेंद्र अंग्रेजी से एमए पास हैं, उन्होंने कहीं नौकरी करने के बजाए जानकारी लेकर खेती करने को अपना प्रमुख आधार बनाया।

उनके बाग में एक नहीं बल्कि कई प्रकार के फल उगाए जाते हैं। इसके लिए उन्होंने एचएयू से सलाह लेकर पौधों की बुबाई व देखभाल करने के तरीकों की जानकारी ली। मॉर्डन तकनीक से यह काम किया तो आज उन्कें प्रति एकड़ कम से कम 2 लाख रुपये का फायदा होता है। खास बात है कि उन्हें पेड़ों से फलों को भी तोडऩा नहीं पड़ता। रेहड़ी लगाने वाले खुद ही फल तोड़ते हैं और उन्हें लेबर चार्ज काटकर भुगतान कर देते हैं।

अगर निवेश की बात कीजाए तो राजेंद्र ने बताया कि वह आम हो या आड़े इन पर प्रति एकड़ 15 से 20 हजार रुपये ही का निवेश करते हैं। उन्होंने बताया कि पहले वह दूर-दूर पौधे लगाया करते थे, इससे आय तो होती मगर औसतन ही रहती। मगर एचएयू के कृषि विज्ञान केन्द्र के एक्सपर्ट ने सलाह दी तो उन्होंने हाई डेन्सिटी यानि अधिक पास-पास पौधे लगाने शुरू किए। अब यह पेड़ बन चुके हैं। इसमें एक तो पौधों की तादात बढ़ी, दूसरा फायदा हुआ कि फलों का प्रोडक्शन भी बढ़ गया। उन्होंने कुछ समय पहले फैक्ट्री भी लगा ली थी मगर भाई के देहांत के बाद इसे बंद करना पड़ा।

आड़ू…………

8 वैरायटी का प्रोडक्शन करते हैं।

इस फसल को 8 अप्रैल से लगाना शुरू किया जाता है।

3 से 4 वर्ष में इस पर फल भी आ जाते हैं।

2 एकड़ में लगाए गए आड़ू कम से कम 4 लाख रुपये की आय करवाते हैं।

आम………….

2 एकड़ में आम की पैदावार करते हैं।

5 प्रकार की किस्मों की पैदावार की जाती है। जिसमें दशहरी, वेनीसा आम, तोता परी, अचारी, लंगडा, आम्रपाली वैरायटी शामिल हैं।

2 लाख रुपये की पैदावार होती है।

किन्नू……………..

4 एकड़ में किन्नू की खेती करते हैं।

5 वर्ष बाद फल आता है।

2 लाख रुपये से अधिक की पैदावार हाती है।

अमरूद………….

6 वैरायटी अमरूद की लगाई जा रही हैं।

2.5 लाख रुपये की आमदनी होती है।

हैबी पूङ्क्षनग के माध्यम से 25 से 50 फुट के पेड़ों को 8 से 10 फुट का बना दिया है। ताकि आसानी से फल तोड़े जा सकें।

ड्रिप व नाली के माध्यम से ङ्क्षसचाई की जाती है।

पशुओं से भी होती है आय…………

राजेंद्र सिर्फ फलों से ही नहीं बल्कि पशुओं से भी आय करते हैं। उनके पास इस समय 6 भैंस हैं जिनके दूध को बेचकर भी वह आय करते हैं। इन पशुओं पर वर्ष भर में वे 1 लाख रुपये खर्च करते हैं, इनसे 1.50 लाख रुपये का लाभ भी हो जाता है।

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