मेक इन पानीपत की बनी मशीनरी दे रही है चीन को मात

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पानीपत के छोटे टेक्सटाइल उद्यमियों के लिए जब सस्ता चीनी माल परेशानी बना तो उन्होंने चीन की ही तकनीक से उसे पछाड़ दिया। पानीपत स्माल इंजीनियरिंग वर्कशाप एसोसिएशन के कुछ सद्स्यों ने चीन की टेक्नोलॉजी से पानीपत में ही ऐसी मशीनरी बनाई कि आज यही उद्यमी चीन को टक्कर दे रहे है। इस मशीनरी की मांग यूपी, मध्यप्रदेश,कर्नाटक, तमिलनाडू और अन्य राज्यों में भी है। यहां बनी मशीनरी में मैन्यूअल जैकार्ड की जगह इलेक्ट्रॉनिक्स जैकार्ड, पावरलूम की बजाय रपियर लूम का इस्तेमाल हो रहा है। इस प्रकार के डिजाइनों के साथ पिक एट व्हील फोर बाई फोर मशीनरी से बनने वाली दरियां चीन के माल पर भारी पड़ रही है।

पानीपत स्माल इंजीनियरिंग वर्कशाप एसोसिएशन के प्रधान सुखबीर मलिक ने कहा कि पानीपत में बनी मशीनरी कई राज्यों में जा रही है। उन्होंने कहा कि अगर केंद्र और राज्य सरकार पानीपत के छोटे पीछे छोड़ देंगे उन्होंने कहा कि पानीपत के सेक्टर- 25 में छोटे उद्दमियों के लिए क्लस्टर बनाया जाना था लेकिन वह आठ साल से अधर में है। क्लस्टर प्लाट के लिए एसोसिएशन और बिल्ड़िंग के 1.5 करोड़ रुपए सरकार ने देने थे क्लस्टर में लगने वाली वाली मशीनरी के दस करोड़ केंद्र को देने थे। उन्होंने कहा कि हमने प्लाट के डेढ़ करोड़ रुपए जमा करवा है। लेकिन न तो हरियाणा और न ही केंद्र सरकार ने राशि दी है। यदि यह क्लस्टर बन जाए तो नयी टेक्नोलॉजी की मशीनें काफी मददगार होंगी।

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