भाजपा के लिए नुकसान की बात होगी कर्नाटक में सरकार बनाना, विपक्ष में रही तो मोदी का दोबारा PM बनना होगा आसान

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Deepkamal Saharan
Yuva Haryana, Chandigarh
भले ही भाजपा जी-जान से कर्नाटक में सरकार बनाने की कोशिशों में लगी हो लेकिन पार्टी के लिए फायदे की बात यह होगी कि वो कर्नाटक में सरकार ना बनाए। इसके पीछे तथ्यात्मक कारण हैं।
भाजपा के लिए आगे महत्वपूर्ण 2019 का लोकसभा चुनाव हैं जब उसे एक-एक सीट की दरकार होगी। भाजपा को कर्नाटक की 28 सीटों में से ज्यादा से ज्यादा सीटें चाहिए तो वहां विपक्ष में रहना चाहिए। 2014 में वहां कांग्रेस की सरकार होते हुए भाजपा को 17 सीटें मिल गई थी लेकिन 2014 के बाद का इतिहास बताता है कि अगर वहां अब भाजपा ने सरकार बना ली तो 2019 में सीटें पक्का कम हो जाएंगी।
दरअसल भाजपा ने बीते तीन सालों में उन तमाम जगहों पर लोकसभा उपचुनाव हारे हैं जहां उसने कुछ समय पहले ही सरकार बनाई थी। जहां भाजपा सत्ता में नहीं होती, वहां जरूर पार्टी का अच्छा प्रदर्शन रहा है लेकिन जहां भाजपा की सरकार हो, वहां खराब।
मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद 5 ऐसे राज्यों में चुनाव हुए हैं जहां भाजपा सरकार में थी। इनमें से 4 जगह 2014 के बाद चुनाव होने पर पार्टी की सीटें बहुत कम हो गई, सिर्फ झारखंड में ही पार्टी की सीटें बढ़ीं।
सरकार बनाने का नुकसान भाजपा को इस कदर होता है कि उत्तरप्रदेश में खुद मुख्यमंत्री की लोकसभा सीट गोरखपुर पर उपचुनाव में पार्टी औंधे मुंह गिरी जहां वो 35 साल से नहीं हारी थी, और जिस लोकसभा सीट में सभी विधायक भाजपा के हैं।
यह रिकॉर्ड की बात है कि जहां लोगों ने भाजपा को सत्ता दे रखी है, वहां चुनाव होने पर भाजपा को नुकसान हो रहा है। लगभग हर ऐसी जगह जहां बीजेपी सत्ता में थी, वहां पिछले सालों में हुए चुनावों में पार्टी का ग्राफ गिरा ही है।
मई 2014 में नरेंद्र मोदी जी के प्रधानमंत्री बनने के बाद गुजरात और गोवा में भाजपा की सरकार होते हुए चुनाव हुए, गुजरात में पार्टी की सीटें 115 से घटकर 99 रह गई और गोवा में 21 से घटकर 13. हालांकि सरकार दोनों जगह फिर से भाजपा ने ही बनाई।
पंजाब में भाजपा की सीटें 12 से घटकर 3 रह गई और उनका गठबंधन सत्ता से बाहर हो गया।
बिहार में कुछ दिन पहले तक नितीश कुमार के साथ सत्ता में रही भाजपा को चुनाव होने पर काफी नुकसान हुआ और सीटें 91 से घटकर 53 रह गई।
एकमात्र राज्य जहां बीजेपी सत्ता में थी और उसकी सीटें बढ़ी, वो है झारखंड। बीजेपी का गठबंधन वहां सत्ता में था और मुख्यमंत्री झारखंड मुक्ति मोर्चा के हेमंत सोरेन थे।
‘यानी बीजेपी को सत्ता दे चुके लोग जल्द ही असंतुष्ट हो रहे हैं और केंद्र में पार्टी की सरकार होने के बावजूद बीजेपी को पहले से कम वोट दे रहे हैं। केंद्र या राज्य में सत्ता में होने का जहां किसी आमतौर पर किसी दल को फायदा मिलता है, वहीं बीजेपी के लिए यह नुकसान की बात साबित हो रही है।’
निचोड़ ये है कि कांग्रेस के मुकाबले लोग बीजेपी को बहुत पसंद कर रहे हैं, लेकिन जहां बीजेपी पहले से सत्ता में है, वहां लोग उनसे निराश हो रहे हैं। बीजेपी ने अगर कर्नाटक में सरकार बनाई तो राज्य सरकार से संभावित निराशा उसे लोकसभा चुनाव में नुकसान पहुंचाएगी।

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