मानेसर जमीन घोटाला: सीबीआई विशेष अदालत में दायर हो सकती है एक और चार्जशीट

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सीबीआई ने चार्जशीट में लिखा कि जांच के दौरान यह साबित होता है कि तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने जमीन रिलीज करने की जो दलील दी थी, वह न तो सार्थक थी और न ही वैध। जांच में यह भी पता चला कि हुड्डा ने जो आधार बताए थे, वह सिर्फ दिखावा था।

साथ ही सीबीआई ने कहा कि छापेमारी के दौरान कई कंपनियों और आरोपियों के बैंक खातों की जानकारी मिली है, जिसकी जांच की जा रही है। उसमें कुछ गलत मिला तो सीबीआई की विशेष अदालत में एक और चार्जशीट दायर की जाएगी।

प्रीमियर जांच एजेंसी ने बताया कि भू अर्जन कलेक्टरों ने भी जमीन का मार्केट रेट तय नहीं किया है। बल्कि कलेक्टर रेट पर ही जमीन अधिग्रहण का मुआवजा तय करते रहे जिससे जमीन मालिक सरकार से मिलने वाले कम मुआवजे के कारण अधिग्रहण प्रक्रिया के दौरान कलेक्टर रेट से छोड़ी ज्यादा कीमत पर अपनी जमीन बिल्डरों को बेच देते और बाद में सीएलयू और लाइसेंस लिए गए। आरोपित कंपनियों और व्यक्तियों ने धारा 4 और 6 की अधिसूचना के बाद ज्यादा जमीन खरीदी और गलत मुनाफा कमाया।

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