नरवाना के मनजीत ने रचा इतिहास, 800 मीटर दौड़ में जीता गोल्ड

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Gulshan Chawla, Yuva Haryana

Narwana, 29, August, 2018

नरवाना के मंजीत चहल ने रचा इतिहास- 800 मीटर दौड़ में जीता गोल्ड मैडल- एंकर जकार्ता में आयोजित एशियाड खेलों में नरवाना के मंजीत चहल ने गोल्ड मैडल प्राप्त कर इतिहास रच दिया है। गौरतलब है कि नरवाना के मंजीत चहल का 800 मीटर दौड़ में ऐशियन खेलों चयन हुआ था। मंगलवार को मंजीत ने अपने खेल में गोल्ड जीतकर विश्व में देश का नाम रोशन किया है। मंजीत की सफलता के बाद उसके घर पर बधाई देने वालों का तांता लग गया। परिवार के सदस्यों की खुशियों का कोई ठिकाना नहीं रहा।

साल से अपने खेल का अभ्यास कर रहे नरवाना के मंजीत सिंह चहल को अब जाकर सफलता मिली है। यह सफलता उसे गोल्ड मेडल के रूप में प्राप्त हुई। मंजीत ने 800 मीटर दौड़ में गोल्ड जीता है।

मंलगवार को पूरे दिन लोग मंजीत का खेल देखने के लिए टीवी पर नजरे टिकाए हुए थे। उसका खेल शाम को 6 बजे शुरू हुआ और उसने सवा 6 बजे एक गोल्ड मेडल देश की झोली में डाल दिया। खेल में विजेता होने के बाद परिजनों की खुशी का ठिकाना नहीं है।

गोल्ड मिलते ही परिजनों ने लड्डु बांटने शुरू कर दिए और बधाई देने वाले लोगों का तांता भी उसके घर पर लगा रहा। नरवाना के नवदीप स्टेडियम में भी खेल प्रेमियों द्वारा ढोल नगाड़ों के साथ खुशी मनाई गई।

मंजीत की मां ने बताया कि उसका बेटा पिछले 18 साल से अपने खेल का अभ्यास रहा है। उसका सपना था कि वह अपने देश के लिए गोल्ड मेडल जीते, जो अब उसने पूरा कर लिया है। वहीं मनजीत की बहन ने बताया कि मंजीत ने कई माह भूटान में अभ्यास किया है। इससे पूर्व मनजीत चहल ने गोहाटी में संपन्न खेलों में हरियाणा की ओर से खेलते हुए 800 मीटर दौड़ में सिल्वर पदक जीता था। जिसके बलबूते पर उन्हें एशियाई खेलों में खेलने का मौका मिला है।

मनजीत चहल की बहन ने कहा कि उन्हे विश्वास था कि उनका भाई जकार्ता में खेलते हुए देश के लिए जरूर कोई खुशखबरी लाएगा। मंजीत की पत्नी किरण ने बताया कि मंजीत पिछले 6 माह से अपने खेल के अभ्यास के लिए घर से दूर रहा। इसी बीच मंजीत की पत्नी ने एक बेटे का भी जन्म दिया। लेकिन पदक जितने की लालसा में उसने अपने बच्चे के जन्म पर भी घर आना जरूरी नहीं समझा।

अब मंजीत का बेटा साढे 5 माह का है। किरण ने बताया कि उसके पति की इस जीत के बाद उसकी खुशी का ठिकाना नहीं है।

हर व्यक्ति की सफलता के पीछे किसी न किसी का हाथ होता है। मंजीत की इस सफलता के पीछे उसके पिता रणधीर सिंह चहल का हाथ है। रणधीर सिंह अपनी जवानी में कबड्डी और हैम्मर थ्रो के अच्छे खिलाड़ी रहें हैं और उन्होंने मंजीत को लगातार अपने खेल का अभ्यास करते हुए आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।

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