मजबूत अधिकारों के साथ आ रहे हैं नगरनिगमों के मेयर, राज्य सरकार ही हटा सकेगी पद से

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Yuva Haryana

राज्य के 10 नगरनिगमों में मेयर चुने जाने की व्यवस्था में राज्य सरकार ने हाल ही में महत्वपूर्ण बदलाव किया है। पहले जहां चुने हुए पार्षद अपने में से एक को मेयर बनाते थे, वहीं अब शहर के लोग मेयर के लिए अलग से सीधा वोट डालेंगे। इसके साथ ही सरकार ने व्यवस्था की है कि सीधे चुनाव से चयनित हुए मेयर को पार्षद अविश्वास प्रस्ताव के जरिए नहीं हटा सकेंगे। मेयर के निलंबन या बर्खास्तगी का अधिकार राज्य सरकार के पास रहेगा।

इस नई व्यवस्था से निगमों के मेयर की पावर बढ़ जाएगी। वो अब पार्षदों के रहमोकरम या दबाव में काम करने को बाध्य नहीं होगा। हां, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर पदों के लिए पहले की तरह निर्वाचित पार्षद ही अपने में से सदस्य चुनेंगे। निगम के पार्षद ही सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर को हटा भी सकेंगे। नए कानून में मेयर की नगर निगम के समस्त रिकार्ड तक पहुंच होगी। मेयर नगर निगम के कमिश्नर को फैसले लागू करने के लिए निर्देश दे सकता है और इस बारे में रिपोर्ट भी ले सकता है। मेयर को सरकारी आवास, टेलीफोन और वाहन की सुविधाएं भी मिलेंगी।

लगभग हर निगम, परिषद या पालिका चुनाव के बाद पार्षदों की धड़ेबाज़ी और खरीदफरोख्त की खबरें आती रही हैं। अक्सर राजनीतिक दलों के बड़े नेता भी इन महत्वपूर्ण पदों पर अपने चहेते पार्षदों को बैठाने के लिए सक्रिय हो जाते हैं। सीधे चुनाव की व्यवस्था से शहरी निकायों में मेयर के चुनाव में तो खरीदफरोख्त बंद हो जाएगी क्योंकि वो अब लोगों के सीधे वोट से चुना जाएगा।

मेयर की तर्ज पर अब नगरपरिषद और नगरपालिका के अध्यक्षों के चुनाव भी सीधे कराए जाने की मांग जोर पकड़ने लगी है ताकि वहां भी नगरपरिषद अध्यक्ष और नगरपालिका प्रधान के चुनाव में पार्षदों की खरीद फरोख्त बंद हो सके।

नई व्यवस्था में मेयर के पद पर बने रहने की चाबी राज्य सरकार के पास रहेगी। कुछ विशेष  परिस्थितियों में राज्य सरकार मेयर को एक सुनवाई का मौका देकर सीधे अपने पद से हटा सकती है। सरकार चुने गए मेयर को छह माह के लिए सीधे सस्पेंड भी कर पाएगी। अगर मेयर पर नैतिकता हनन का मामला है तो उसे ज्यादा समय के लिए भी सस्पैंड किया जा सकेगा।

सरकार अगर किसी चुने गए मेयर को सस्पेंड करती है अथवा पद से हटाती है तो मेयर का कार्यभार सीनियर डिप्टी मेयर या डिप्टी मेयर को नहीं दिया जाएगा। बल्कि सीधा चुने गए मेयर की कैटेगरी/वर्ग के उसी पार्षद को दिया जाएगा, जिसके साथ सबसे अधिक पार्षदों का समर्थन होगा। अगर मेयर बीमारी या किसी अन्य कारण से छुट्टी पर होगा तो सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर कामकाज देख सकेंगे। प्रदेश में इस समय 10 नगरनिगम, 18 नगरपरिषद और 53 नगरपालिकाएं हैं। 5 नगरनिगमों के चुनाव अगले कुछ महीनों में होने हैं।

 

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