CAG की रिपोर्ट ने MDU रोहतक की खोली पोल, यहां ना पढ़ाई, ना ही सुविधाएं

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हरियाणा में शिक्षा का स्तर दिन प्रतिदन किस तरह गिरता जा रहा है उसका अंदाजा आप CAG की रिपोर्ट से लगा सकते है। हरियाणा में क्वालीफाइड टीचरों की कमी और ऑथोरिटीज के निराशाजनक रवैया ने राज्य में छात्रों के भविष्य को खतरे में डाल दिया है। जिस कारण दूसरी ओर पढ़े लिखे लोग चपड़ासी की नौकरियों के लिए अप्लाई कर रहे हैं।

हाल ही में CAG की रिपोर्ट में सामने आया है कि हरियाणा की सबसे पुरानी और सबसे बड़ी यूनिवर्सिटी MDU में 2015-16 में सिर्फ 41% छात्र ही पास हुए हैं। जबकि तीन साल पहले ही यहां पास प्रतिशत 55% था। वहीं 2012-13 के बाद से लगातार MDU में पास होने का स्तर गिर रहा है।

2017 में MDU के अंतर्गत करीब 249 कॉलेज थे। एमडीयू ने बहुत से ऐसे संस्थान को भी संपर्क में लिया है, जिनके पास इंफ्रास्ट्रक्चर तक नहीं है। 40 अलग-अलग कॉलेजों की जांच के बाद CAG ने पाया कि 27 कॉलेजों में जरूरी टीचिंग स्टाफ तक नहीं है, तो कहीं टीचर्स ही पूरी तरह शिक्षित नहीं हैं। साथ ही 40 में से 16 कॉलेजो की प्रयोगशालाओं में जरूरी उपकरणों भी नहीं है।

आपको बता दें कि हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर रोहतक के पंडित नेकी राम कॉलेज से पढ़ाई की है। लेकिन नेकी राम कॉलेज में BA और BSc में जितनी सीटें हैं, उससे ज्यादा छात्रों के तो यहां एडमिशन है। BA फाइनल ईयर के एक छात्र का कहना है कि हमारे क्लासरूम छोटे हैं पर बच्चे ज्यादा हैं। साथ ही फैकल्टी की भी कमी है। जिसके लिए पार्ट टाइम लेक्चरार्स को लाया जाता है। लेकिन वो पढ़ाने से ज्यादा पर्मानेंट करने को लेकर प्रदर्शन करते रहते हैं।

MDU से संबधित कॉलेजों में 2017 में टीचरों के 101 पद खाली पड़े थे। पिछले साल MDU में चपड़ासी के 92 पदों के लिए 23,166 लोगों ने अप्लाई किया था। जिसमें MA, M.Ed और M.Phil की डिग्री वाले लोग भी शामिल थे।

वहीं CAG ने MDU की UIET के प्लेसमेंट के आंकड़ो को भी दर्शाया है। CAG ने रिपोर्ट में कहा है कि पिछले 2 साल में UIETसे सिर्फ 13% प्लेसमेंट हुई है। फाईनल ईयर के छात्रों का कहना है कि UIET का सिलेब्स बहुत ज्यादा हार्ड है।

वहीं PhD कानून की पढ़ाई कर रहे INSO के MDU अध्यक्ष प्रदीप देशवाल का कहना है कि छात्र परीक्षाओं की तैयारी करने के लिए पूरी तरह से खुद पर निर्भर थे। विश्वविद्यालय में शिक्षक तो सेमिनार, सम्मेलनों और लेखन शोध पत्र आदि में व्यस्थ है। MDU के कुलपति जगन कुमार पुनिया ने इस मामले पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है। उनका कहना है कि मैंने सीएजी के अधिकारियों को पहले ही जवाब दे दिया है। लेकिन CAG ने कहा कि विश्वविद्यालय के जवाब संतोषजनक नहीं थे।

 

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