MDU ने एक कंपनी को किया 26 करोड़ का ज्यादा भुगतान, CAG ने खोली पोल

हरियाणा

महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी रोहतक ने एक ऐसी कंपनी को कंप्यूटीकरण का ठेका दे दिया, जो दूसरी कंपनियों के मुकाबले योग्य नहीं थी।

बाद में इसी कंपनी को 26 करोड़ रूपये से ज्यादा भुगतान भी कर दिया। इस कंपनी ने काम भी पूरा नहीं किया। यूनिवर्सिटी की आंतरिक पोल CAG ने खोली। CAG की रिपोर्ट विधान सभा में पेश हो गई है।

यूनिवर्सिटी ने प्रशासन, वित्तीय, शैक्षणिक, कॉलेजों की संबद्धता, अनुसंधान और अन्य कार्यों के लिए कंप्यूटरीकरण के लिए 20 फरवरी, 2010 को टेंडर जारी किए। नायसा कम्युनिकेशन को 2010 से एक साल के भीतर सारा कंप्यूटरीकरण काम पूरा करना था और डाटा सैंटर बिना किसी अतिरिक्त लागत के चलाना था।

प्रति स्टूडेंट 199 रूपये की दर से तीन लाख के लिए परीक्षा लागत करीब 6 करोड़ रूपये परिकलित की गई। मगर यूनिवर्सिटी ने यह काम 12 महीने से बढ़ाकर 16 महीने कर दिया।

तीन साल की परीक्षा का पूरा पैसा 6 करोड़ रूपये के बाजाए 32.31 करोड़ रूपये का भुगतान कर दिया। लापरवाही बरतने से बड़े पैमाने पर हानि हई।

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