हरियाणा में है देश का सबसे पिछड़ा जिला -केंद्र सरकार

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Yuva Haryana

New Delhi, 29 March 2018

भले ही हरियाणा राज्य कई मायनों में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो, लेकिन यह एक आधिकारिक सत्य है कि देश के सबसे पिछड़े जिलों में सबसे पहले नंबर पर हरियाणा का नूंह जिला है। कमाल की बात यह भी है कि यह क्षेत्र राजधानी दिल्ली के बहुत नजदीक है और गुड़गांव से तो बिल्कुल सटा हुआ है।

केंद्र सरकार के नीति आयोग की मानें तो देश के 101 संभावना वाले (या पिछड़े) जिलों में भी हरियाणा का मेवात सबसे पिछड़ा है। इसके बाद तेलंगाना का आसिफाबाद, मध्य प्रदेश का सिंगरौली, नगालैंड का किफिरे और उत्तर प्रदेश का श्रावस्ती पांच सबसे पिछड़े जिलों में शामिल हैं।

गौरतलब है कि लगभग डेढ़ दशक से मेवात क्षेत्र के विशेष विकास के लिए मेवात विकास प्राधिकरण बनाकर काम करवाए जा रहे हैं। इसके तहत इस जिले के लिए अलग से बजट का इंतज़ाम किया जाता है। मेवात में विशेष मॉडल स्कूल खोले गए हैं और सरकारी  अध्यापकों के लिए अलग से मेवात कैडर बनाया गया है। कई नई योजनाओं के पायलट प्रोजेक्ट मेवात क्षेत्र से ही शुरू किये गए हैं। क्षेत्र से कुंडली-मानेसर-पलवल एक्सप्रेस वे भी गुजरता है और वहां वाले हिस्से पर शुरू भी हो गया है। जिले के रोज का मेव में औद्योगिक क्षेत्र भी विकसित किया गया है जहां सैंकड़ो उद्योग लग चुके हैं।। इन सब प्रयासों के बावजूद यहां ना जीवन स्तार सुधर रहा है, ना ही विकास की रफ्तार तेज हो पाई है। यह राज्य सरकार के लिए वाकई चिंता की बात है।

राजधानी दिल्ली से बेहद करीब मेवात क्षेत्र का पिछड़ापन चिंताजनक विषय है।

 

नीति आयोग ने जिन 115 संभावना वाले जिलों की पहचान की है, उनमें से 101 के आंकड़े राज्य सरकारों से मिल गए हैं और इनकी पहली रैंकिंग बुधवार को राजधानी दिल्ली में जारी की गई।

आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमिताभ कांत ने बताया कि रैंकिंग का उद्देश्य किसी जिले को नीचा और किसी अन्य को बेहतर बताना नहीं है। इसका उद्देश्य इन जिलों में आपसी प्रतिस्पर्द्धा पैदा कर विकास के लिए प्रोत्साहित करना है। इससे राज्य सरकारों, स्थानीय सांसदों तथा जिलाधीशों को यह पता चल सकेगा कि किन जिलों में ज्यादा काम करने की जरूरत है।

हर जिले को 49 विषयों जैसे टीकाकरण, बीच में पढ़ाई छोड़ना, शिशु मृत्यु दर आदि पर अंक दिए गए हैं। हर जिले को यह पता होगा कि वे इन मामलों में अपने ही राज्य तथा देश के सर्वश्रेष्ठ जिलों की तुलना में कहां ठहरते हैं और कहां ज्यादा काम करने की आवश्यकता है।

नीति आयोग का कहना है कि इन जिलों के पिछड़ेपन का कारण पैसे की नहीं, प्रशासन की कमी है। इन जिलों के लिए केंद्र सरकार के स्तर पर 115 प्रभारी अधिकारी बनाए गए हैं जो अतिरिक्त सचिव या संयुक्त सचिव के स्तर के होंगे।

जिलों की प्रगति के पैमाने में शिक्षा एवं पोषण के लिए 30 अंक, शिक्षा के लिए 30 अंक तथा कृषि एवं जल संसाधन के लिए 20 अंक दिए गए हैं। शेष 20 अंक वित्तीय समावेशन, कौशल विकास और मूलभूत ढांचों के लिए हैं।

 

जारी की गई सूची के 101 जिलों में से 33 नक्सल प्रभावित हैं। इनके विकास की देखरेख का काम गृह मंत्रालय करेगा। नीति आयोग को 25 जिलों और केंद्रीय मंत्रालयों को 43 जिलों की जिम्मेदारी दी गई है। इन पिछड़े जिलों में सबसे अच्छा प्रदर्शन वाले पांच में आंध्र प्रदेश के विजयनगरम, छत्तीसगढ़ के राजनंदगांव, महाराष्ट्र के उस्मानाबाद, आंध्र प्रदेश के कडप्पा और तमिलनाडु के रामनाथपुरम को रखा गया है।

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