दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले के बाद मिर्चपुर गांव में छाई मायूसी, सीबीआई जांच की उठी मांग

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Ajay Lohan, Yuva Haryana
Narnoud, 24 August, 2018
हाईकोर्ट ने 2010 हरियाणा में हुए मिर्चपुर कांड में दलितों पर हुए हमले और दो दर्जन से ज़्यादा दलितों के घर को जलाने के आरोप में 20  लोगों को उम्र कैद की सज़ा सुनाई है। कोर्ट के इस फैसले के बाद गांव में सन्नाटा पसरा हुआ है। प्रत्येक गली में मायूसी देखने को मिल रही है । दलितों व गांव के अन्य लोगों का कहना है कि यह फैसला गांव की उम्मीदों के विपरीत आया है।
इससे गांव में भाईचारा कायम करने में बाधाएं उत्पन्न होंगी । वही पुलिस ने किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए सभी तैयारियां कर ली है और गुप्तचर विभाग को सचेत कर दिया है। और साथ ही अनेक पुलिस कर्मचारियों को भी तैनात किया गया है । कोर्ट के इस फैसले के बाद प्रशासन को डर है कि कहीं कोई गड़बड़ी ना हो जाए इसलिए चाक चौबंद सुरक्षा के इंतजाम किए गए हैं।
2010 में मिर्चपुर गांव के अंदर आगजनी के बाद यह गांव पूरे देश में सुर्खियों में आ गया था । दोनों तरफ अनेक सामाजिक संगठनों गया पंचायतों के द्वारा गांव में दोबारा शांति बहाली करने के लिए अनेक प्रयास किए गए थे और वह प्रयास कहीं ना कहीं सफल भी हुए थे। लेकिन आज कोर्ट का जो फैसला आया है उससे गांव में एक बार फिर मायूसी का माहौल पैदा हो गया है। हर किसी की नजर इस मामले पर अटकी हुई है।
गांव में कोई भी व्यक्ति कुछ भी बोलने के लिए तैयार नहीं है। इतना ही नहीं गांव की सभी गलियां सुनसान नजर आ रही है। वहीं पुलिस प्रशासन की बात करें तो पुलिस की तरफ से गांव में कर्मचारियों की तैनाती बढ़ा दी है और चप्पे-चप्पे पर पुलिस व खुफिया तंत्र नजर गड़ाए हुए हैं। इस बारे में जब हमने मिर्चपुर के लोगों से बात करनी चाही तो वह पहले तो कैमरे के सामने कुछ भी बोलने को तैयार नहीं हुए लेकिन जब उन्होंने अपनी बात रखी तो उन्होंने कहा कि हाई कोर्ट का जो फैसला आया है इससे गांव में दोबारा भाईचारा बनाने में कठिनाइयां आएंगी ओर साथ में इस फैसले से पूरे गांव में मायूसी का माहौल है ।
उन्होंने यह भी साफ कर दिया कि इसमें कुछ निर्दोष लोग भी फंसे हैं और अगर प्रशासन ने सरकार ने दोबारा से इस मामले में जागरूकता नहीं दिखाई तो कहीं ना कहीं एक बार फिर गांव में तनाव का माहौल पैदा हो सकता है । देखिए गांव की तस्वीरें इन तस्वीरों को देखकर हर कोई अंदाजा लगा सकता है कि हाईकोर्ट के फैसले के बाद गांव में कैसा सन्नाटा पसरा हुआ है ।
क्या बच्चे क्या बूढ़े क्या बुजुर्ग महिलाएं कोई भी किसी भी गली में नजर नहीं आ रहा है। अगर कोई व्यक्ति नजर आ भी रहा है तो वह कैमरे के सामने कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है । यह फैसला लोगों की उम्मीदों के विपरीत जो आया है।
मिर्चपुर मामले में जेल में रह चुके आरोपी धर्मवीर से जब हमने इस बारे में बात की तो उन्होंने इस मामले पर असंतुष्टि जताई और कहा कि वो एक बार पांच साल की सजा काट चुके है उन्होंने कहा की मामले की सीबीआई जांच होनी चाहिए ।
हाइकोर्ट ने इस सभी को एससी एसटी एक्ट के तहत सज़ा सुनाई है.इससे पहले दिल्ली की निचली अदालत ने 3 लोगों को उम्र कैद की सज़ा सुनाई थी,जिसमें से 17 और लोगों को आज दिल्ली हाइकोर्ट ने दोषी मानते हुए उम्र कैद की सज़ा सुनाई है।
दरअसल घटना 8 साल पुरानी है जब अप्रैल 2010 में हरियाणा के मिर्चपुर इलाके में 70 साल के दलित बुजुर्ग और उसकी बेटी को जिन्दा जिला दिया गया था. जिसके बाद गांव के दलितों ने पलायन कर लिया था.
कोर्ट ने कहा कि इस घटना से दलितों के 254 परिवारों की जिंदगी प्रभावित हुई ,उन्हें अपना गॉव मिर्चपुर को छोड़कर पलायन करना पड़ा। कोर्ट ने कहा कि आज़ादी के 70 साल के बाद भी दलितों के साथ इस तरह की घटना बेहद शर्मनाक है.दलितों के खिलाफ अभी भी अत्याचार कम नहीं हुए है,हरियाणा सरकार को दिया आदेश की उन परिवारों को रिहैबिलिटेशन करें।

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