चंडीगढ़ में खूब बरसा पानी,हरियाणा में रही कमी

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इस बार अगर मानसून की बात करें तो बारिश की कमी नहीं रही और ना ही धान की खेती वाले इलाकों में बारिश की ज्यादा कमी नहीं रही है।
बल्कि दूसरी और बरसात की जितनी उम्मीद की गयी थी उससे कई ज्यादा ही बारिश हुई मौसम विभाग की उम्मीद के मुताबिक इस बार मानसून चंडीगढ़ के लिए तो अच्छा रहा मगर हरियाणा-पंजाब के कई इलाकों को निराश कर गया।

एक जून से लेकर 1 एक सितंबर तक चंडीगढ़ में कुल 695.7 एमएम बारिश होनी थी, जबकि 697.8 एमएम बारिश हो चुकी है। पिछले साल की तरह इस बार भी हरियाणा के कई जिले मानसूून की बारिश से दूर रहे। मानसून सीजन के दौरान हरियाणा में करीब 25 फीसदी बारिश की कमी दर्ज की गई है। हालांकि पिछले सालों के मुकाबले दोनों राज्यों में अच्छी बारिश हुई है।

जानकारों का मानना है कि हरियाणा, पंजाब व चंडीगढ़ की सबसे बड़ी विडंबना यही है कि इन इलाकों में सबसे देरी से मानसून पहुंचता है और विदाई भी सबसे पहले होती है। । इसके अलावा हरियाणा में तेजी से हरियाली घट रही है। इसका भी असर बारिश पर पड़ता है। हालांकि चंडीगढ़ में भी पिछले सालों के मुकाबले कम बारिश हुई है। इसकी भी वजह यही है कि चंडीगढ़ के पेरीफेरी इलाके में तेजी से भवन निर्माण का कार्य चल रहा है।चंडीगढ़ मौसम विभाग के डायरेक्टर सुरेंद्र पाल ने बताया कि 15 सितंबर के आसपास उत्तर भारत के कई इलाकों से मानसून की विदाई हो जाएगी। उसके बाद बारिश की उम्मीद काफी कम है। हालांकि 15 से पहले चंडीगढ़ सहित हरियाणा व पंजाब में बारिश के दो स्पैल आने की संभावना है।

इससे हरियाणा व पंजाब में बारिश की कमी पूरी होने की संभावना है। यदि दोनों ही स्पैल में चंडीगढ़ में अच्छी बारिश हुई तो पांच सालों में सबसे बेहतर मानसून होगा।

बतादें की रोहतक 53 फीसदी,पंचकूला 50 ,फीसदी,गुड़गांव 50 फीसदी ,सोनीपत 50 फीसदी,हिसार 46 फीसदी,पानीपत 46 फीसदी बारिश कम हुई जिसके चलते यह इलाके सूखे रहे।

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