सरकारी स्कूलों में निजी एजेंसियों के कर्मचारी रखने पर सरकार अडिग, भर्ती जारी रखने के आदेश किए जारी

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Yuva Haryana, Chandigarh

राज्य के सरकारी स्कूलों में 19 निजी एजेंसियो के जरिए मल्टी पर्पज वर्कर तैनात करने की नीति को शिक्षा विभाग ने जारी रखा है। इस बारे में पहले इमेल के जरिए जिला शिक्षा अधिकारियों को सूचित किया गया और अब एजेंसियों को भी पत्र भेज कर भर्ती जारी रखने को कहा गया है।

हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद की ओर से जारी इस पत्र में कहा गया है कि एजेंसियां पूर्व निर्धारित शर्तों और नियमों के हिसाब से मल्टी पर्पज वर्कर(अनस्किल्ड) के पदों पर भर्तियां करने का काम जारी रखें। एजेंसियों को 10 जुलाई से यह काम जारी रखने को कहा गया है।

इससे पहले प्रमुख विपक्षी दल इनेलो की ओर से मीडिया के जरिए रखे गए एतराज के बाद राज्य सरकार ने आनन फानन में यह भर्ती रोक दी थी और निजी स्कूलो में आउटसोर्सिंग की नीति पर रोक लगा दी थी। साथ ही भर्ती किए गए कर्मियों को रिलीव करने का आदेश भी जारी कर दिया था। हालांकि इसके 24 घंटे बाद ही विभाग ने जिला शिक्षा अधिकारियों को ईमेल के जरिए यह फैसला वापिस लेने की सूचना दे दी थी।

इस भर्ती में कुछ जगहों पर नौकरी देने के बदले पैसे लेने की शिकायतें भी खबरों में आई थी जिसकी जांच की बात शिक्षा विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव धीरा खंडेलवाल ने कही थी। साथ ही उन्होंने कहा था कि इस नीति के जरिये अध्यापकों की भर्ती नहीं की जाएगी।

एक सप्ताह तक चले इस प्रकरण से लगता है कि मीडिया में छपी आलोचना से सरकार शुरूआत में दबाव में जरूर आई लेकिन बाद में वरिष्ठ अधिकारियों ने सरकार को विश्वास में ले लिया कि नीति में कोई खामी नहीं है। हालांकि नौकरियों के बदले पैसे लेने के आरोपों की जांच अभी बाकी है। साथ ही यह भी राजनीतिक रूप से आलोचना का विषय है कि काम कर रही 19 एजेंसियों में से ज्यादातर हरियाणा से बाहर की हैं और 5 तो सूरत, गुजरात की हैं। इनेलो की तरफ से इन एजेंसियों से भाजपा नेताओं के संबंध होने का आरोप भी लगाया गया था।

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