सरकारी आदेश के बावजूद सरसों की खरीद नहीं हुई शुरू, किसान भारी घाटे में बेचने को मजबूर

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Pradeep Dhankhar, Yuva Haryana
Bahadurgarh, 24 March 2018

हरियाणा सरकार को यह घोषणा किए एक हफ्ते से ज्यादा हो गया कि इस बार सरसों 4000 रूपये प्रति क्विंटल के हिसाब से खरीदनी शुरू कर दी गई है लेकिन राज्य की कई मंडियों में सरकारी खरीद अब तक शुरू नहीं हुई है। एजेंसियों की गैरमौजूदगी की वजह से किसान मजबूर होकर अपनी फसल 4000 तो बहुत दूर, 3500 से भी कम रेट पर बेचने को मजबूर हैं।
अखबारों में यह खबर पढ़कर कि हैफेड ने खरीद शुरू कर दी है, बहुत से किसान अपनी सरसों लेकर मंडियों में पहुंच रहे हैं लेकिन वहां हैफेड के अधिकारी पहुंच ही नहीं रहे। खुशकिस्मती से इस बार सरसों की फसल कुछ अच्छी हुई है लेकिन मंडी व्यापारियों द्वारा खरीद 500-1000 रूपये प्रति क्विंटल कम रेट पर किए जाने से किसानों की कमाई पर पानी फिर रहा है।
राज्य के कई शहरों की तरह बहादुरगढ़ में भी सरसों की फसल की खरीद नहीं होने के कारण किसान परेशान है। सरकारी खरीद नहीं होने के कारण किसान ओने पौने दामों पर 8 दिनों से अपनी फसल बेचने को मजबूर है।
बहादुरगढ़ में आज तक सरसों की खरीद सरकार की ओर से नहीं करवाई गई। अब तक प्राइवेट तेल मिल ही यहां पर खरीद करते आये हैं, लेकिन इस बार कोई भी तेल मिल किसानों की सरसों खरीदने नहीं आया। ऐसे में सरकारी रेट के मुकाबले आढ़तियों को करीब 3400 से 3500 के बीच के दाम पर बेचने को मजबूर है।

सरकार की ओर से प्रदेश भर में महज 13 जिलों में सरसों की सरकारी खरीद इंतजाम किए गए हैं। सरकारी खरीद नहीं होने से परेशान किसानों ने मंडी में प्रदर्शन किया और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी भी की।
वहीँ मार्किट कमेटी के अधिकारियों का कहना है कि किसान अपनी सहूलियत के हिसाब से अपनी फसल यहां लेकर आ रहे हैं। सरकार ने झज्जर की मंडी में अलग अलग दिन सरसों खरीद की व्यवस्था कर रखी है। उन्होंने किसानों से अपनी फसल झज्जर लेजाकर बेचने की अपील की है।

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