हरियाणा की जेल में दी गई थी बापू के हत्यारे नाथू राम गोडसे को फांसी, आज भी वो पेड़ मौजूद

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Yuva Haryana
Ambala, 02 Oct, 2018

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे को हरियाणा के अंबाला की सेंट्रल जेल में फांसी की सजा दी गई थी । नाथू राम गोडसे को 15 नंवबर 1949 को फांसी दी गई थी। इससे पहले अंबाला के सेंट्रल जेल की काल कोठरी में गोडसे और नारायण आप्टे को रखा गया था. जिसके कुछ दिन बाद ही आप्टे को भी फांसी दी गई थी।

नाथू राम गोडसे को जिस पेड़ पर फांसी दी गई थी. वो पेड़ आज भी अंबाला की सेंट्रल जेल में मौजूद है, लेकिन अब वो पेड़ ठूठ में बदल चुका है। यह पेड़ पूरी तरह से सूख चुका है।

बताते हैं कि अंबाला के सेंट्रल जेल में बंद नाथूराम गोडसे को काल कोठरी में रखा गया था. लेकिन इस दौरान गोडसे ने जेल प्रशासन से रोजाना सुबह मंदिर में जाकर पूजा करने की मांग की थी, लेकिन गोडसे को रोजाना मंदिर जाने की अनुमति नहीं मिली थी, लेकिन कभी कभी उन्हे मंदिर लेकर जाया जाता था।

अंबाला की सेंट्रल जेल के बिल्कुल नजदीक प्राचीन शिव मंदिर था जहां पर गोडसे को जेल प्रशासन की तरफ से लेकर जाया जाता था. वहां पर गोडसे शिवलिंग पर जलाभिषेक करते थे।

शोधकर्ता प्रोफेसर अवधेश पांडेय के मुताबिक नाथू राम गोडसे को फांसी से पहले जब अंतिम इच्छा पूछी गई तो उन्होने कहा कि जेल परिसर में मौजूद विशालकाय पेड़ पर लटकाकर फांसी देने की इच्छा जताई थी जिसके बाद गोडसे को उसी पेड़ से लटकाकर फांसी दी गई थी, लेकिन पेड़ की उस टहनी को काट दिया गया था ताकि उस टहनी पर किसी और को फांसी ना दी जा सके।

जेल प्रशासन ने ऐसा इसलिए किया था क्योंकि मरने वाले की अंतिम इच्छा का सम्मान किया था और उस पेड़ की उस टहनी को ही काट दिया गया था जिस पर गोडसे को फांसी पर लटकाया गया था।

फांसी के बाद नाथू राम गोडसे के शव को भी परिजनों को नहीं दिया गया था बल्कि शव को राजपुरा बॉर्डर पर घग्गर नदीं के पास दाह संस्कार कर अस्थियां परिजनों को सौंपी गई थी।

 

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