बाढ़सा में शुरू हुआ हरियाणा का सबसे बड़ा नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट, पहले दिन पहुंचे तीन मरीज

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Pradeep Dhankhar, Yuva Haryana

Jhajjar, 22 Dec, 2018

हरियाणा के झज्जर जिले के गांव बाढ़सा में देश के सबसे बड़े नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट (एनसीआई) ने धरातल पर काम करना शुरू कर दिया है। शुरुआती दौर पर आज कैंसर इंसटीयूट की ट्रायल बेस पर ओपीडी चालू की गई है। पहले दिन ओपीडी में केवल तीन मरीज पहुंचे।

आपको बता दे कि साल 2009 में तत्कालीन यूपीए शासनकाल में उस समय के हरियाणा के मुख्यमंत्री चौ.भूपेन्द्र सिंह हुड्डा सरकार में गांव बाढ़सा में केन्द्र के तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री डा.अंबुमनि रामदौस ने यहां आकर इस कैंसर इंस्टीटयूट की मंजूरी दी थी। बाद में साल 2014 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के हाथों कांग्रेस सांसद दीपेन्द्र हुड्डा ने इस कैंसर इंस्टीटयूट का शिलान्यास भी करवा दिया था।

यह अलग बात है कि इस कैंसर इंस्टीटयूट के निर्माण को पूरी तरह से सार्थकता का रूप देने के लिए केन्द्र की मोदी सरकार में बजट का प्रावधान किया गया। बाद में यहां मोदी सरकार में ही हरियाणा के कृषि मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ के बुलावे पर केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने गांव बाढ़सा आकर इस कैंसर इंस्टीटयूट के निर्माण कार्य के लिए भूमि पूजन किया।

अगले एक साल में यह पूरी तरह से संचालित हो जाएगा, जबकि अब इसे केवल ट्रायल के तौर पर शुरू कर दिया गया है। दिल्ली सीमा से सटे बाढ़सा गांव में एनसीआई शुरू होने से अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) का काम बंट जाएगा। अस्पताल के भवन का निर्माण कार्य अंतिम चरण में है जबकि बुनियादी उपकरण इंस्टॉल किए जा चुके हैं।

कैंसर अस्पताल में चीफ ऑफ इंस्टिट्यूट डॉ. जीके रथ की अध्यक्षता में एनसीआई का शुभारंभ हुआ है। संस्थान में 48 करोड़ की लागत से एक्सटर्न रेडिएशन में इस्तेमाल होने वाले दो लीनियर एक्सलरेटर होंगे, जबकि सीटी स्कैन और एक्स-रे मशीन भी खरीदी जा चुकी हैं। इसके अतिरिक्त लैब में प्रतिदिन 60 हजार सैंपल प्रोसेस करने की क्षमता है।

संस्थान के पूरी तरह से संचालित होने पर एम्स देश में कैंसर केयर के लिए एक नोडल संस्थान के रूप में काम करेगा। फिलहाल एम्स के निदेशक डाक्टर रणदीप गुलेरिया को इसे चलाने का जिम्मेदारी सौंपी गई है। 710 बैड के कैंसर संस्थान को तीन चरणों में पूरा किया जाएगा। पहला चरण अगले वर्ष जनवरी में मध्य में देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के हाथों शुभारंभ होने का अनुमान है। जिसमें 250 बेड की सुविधा होंगी।

एम्स प्रवक्ता के अनुसार दिसंबर 2019 में इंडोर एडमिशन के तौर पर 500 बढ़ाए जाएंगे, जबकि एक साल के बाद यह पूरी तरह से संचालित होने लगेगा। फिलहाल पहले चरण के लिए 634 डॉक्टर, नर्स और टेक्नीशिन्स की जरूरत है, जिनमें से 110 को नियुक्त कर लिया गया है।

 

 

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