पदक विजेता खिलाड़ी सड़कों पर लगा रहे दौड़, कब सुधरेंगे स्टेडियम के हालात ?

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Devender Singh, Yuva Haryana

Kosli, 25 July, 2018

कहते हैं कि अगर व्यक्ति में कुछ करने या पाने का जुनून हो, तो परिस्थितियां मंजिल हासिल करने में बाधा नही बन सकती।  जुनून ओर बुंलद हौंसले के सामने परिस्थितिया स्वत: ही घुटने टेक देती है।

ऐसा ही कुछ कर दिखाया है कोसली के गांव रत्नथल के दिव्यांग अमित चौहान ने। पिछले माह बहादुरगढ़ में आयोजित धमिका काई कराटे फाउनडेशन द्वारा आयोजित आल इंडिया कराटे चैंपियनसिप में ब्लैक बैल्ट हासिल किया है।

बता दें कि कराटे में सबसे बड़ी उपलब्धि ब्लैक बेल्ट कही जाती है। कराटे में पदक के साथ बेल्ट का बड़ा महत्व होता है और ब्लैक बेल्ट हासिल करना हर खिलाड़ी का सपना होता है। खास बात तो यह है कि दिव्यांग होते हुए अमित ने दो कड़ी प्रतियोगिता से गुजरते हुए यह उपलब्धि हासिल की है।

इसी गांव की बच्चियो ने 2017 में जोधपुर में आयोजित नैशनल कराटे चैंपियनशिप में सिल्वर मैडल और हिसार में आयोजित ऑल इंडिया गल्र्स कराटे चैंपियानशिप में 3 लड़कियो ने हिस्सा लिया, जिसमें रीना ने सिल्वर, खुशबु ने कांस्य व स्वर्ण पदक हासिल किए थे।

लेकिन गांव में खेल सुविधा के नाम पर सरकार ने 2011- 12 में 30 लाख की लागत से खेल स्टेडियम की चार दिवारी तो बना दी, परंतु इसमें चार दिवारी के अलावा कुछ भी नहीं है।

गांव के युवा खिलाड़ियो ने बताया कि हमारे गांव में शुरू से ही युवाओं में खेल के प्रति रूझान रहा है। जिस कारण गांव के अधिकतर बच्चे सेना में भर्ती होते हैं। गांव के बच्चों ने बताया कि हम भी इन खिलाड़ियों से प्ररेणा लेकर खेल के क्षेत्र में गांव व प्रदेश का नाम रोशन करना चाहते है, लेकिन खेल स्टेडियम में 30 लाख की लागत लगने के बाद भी बच्चों के खेलने लायक जगह नहीं है।

जमीन ठीक नही है, न पानी का प्रंबध है, खिलाड़ियो की जगह यंहा पशु दौड़ लगाते देखे जा सकते है। आखिर सरकार की कार्यशैली देखकर गांव के खिलाड़ियों ने अपने पैसो से मैदान में को समतल कराया है ताकि वो दौड़ लगा सके। स्टेडियम में खेल सुविधा ना होने के वजह से सड़को पर दौड़ लगाकर अपने जीवन को खतरे में डाल रहे है।

 

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