Home Breaking चैत्र नवरात्रि के पहले दिन जाने मां शैलपुत्री की पूरी कहानी-

चैत्र नवरात्रि के पहले दिन जाने मां शैलपुत्री की पूरी कहानी-

0

Shweta Kushwaha, Yuva Haryana

Chandigarh, 6 April, 2019

साल के सबसे पावन दिनों की शुरुआत हो चुकी है। नौ दिनों तक चलने वाले चैत्र के नवरात्रि में माता के सभी रूपों की पूजा की जाती है और भक्त अपनी भक्ति में लीन होकर सच्चे मन के साथ मां के लिए व्रत और पूजा- अर्चना करते हैं।

आज यानि की पहले नवरात्रि के दिन माता के पहले स्वरूप शैलपुत्री की पूजा की जाती है।

युवा हरियाणा पर पढ़िए मां शैलपुत्री की पूरा कहानी-

मां शैलपुत्री को सती के नाम से भी जाना जाता है। उनके पिता प्रजापति दक्ष ने एक बार यज्ञ करवाने का फैसला किया था, इसके लिए उन्होंने सभी देवी-देवताओं को निमंत्रण भी भेज दिया था। लेकिन भगवान शिव को इसका निमंत्रण नहीं भेजा गया था। देवी सती को लग रहा था कि उनके पास इस यज्ञ का निमंत्रण जरूर आएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

माता सती इस यज्ञ में जाने के लिए काफी बेचैन थी, लेकिन भगवान शिव ने वहां जाने के लिए साफ मना कर दिया था। भगवान शिव ने माता सती को कहा कि यज्ञ में जाने के लिए उन्हें कोई निमंत्रण नहीं आया है, इसलिए वहां जाना उचित नहीं होगा। लेकिन माता सती लगातार यज्ञ में जाने के लिए भगवान शिव से आग्रह करती रहीं और आखिरकार भगवान शिव ने उन्हें यज्ञ में जाने के लिए अनुमति दे दी।

सती जब अपने पिता प्रजापति दक्ष के यहां पहुंची, तो उनके साथ किसी ने भी आदर और प्रेम से बातचीत नहीं की। वहां मौजूद सभी लोग उनसे मुंह फेर रहे थे और केवल उनकी मां ने उन्हें स्नेह से गला लगाया। सती की बहने भी उनका मजाक उड़ा रही थी और उनके पति भगवान शिव को भी तिरस्कृत कर रही थी। इसके साथ ही सती के पिता दक्ष ने भी काफी अपमान किया, जिस कारण सती काफी दुखी हो गई। इस अपमान को वह सहन नहीं कर सकी और एक बड़ा कदम उठा डाला, जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की होगी।

सती ने यक्ष में कूदकर खुद को स्वाहा कर दिया और अपने प्राण त्याग दिए। जैसे ही भगवान शिव को इस बात की खबर लगी, वह काफी दुखी हो गए और गुस्से की ज्वाला में जलते हुए यक्ष को ध्वस्त कर दिया। जिसके बाद सती ने हिमालय के यहां जन्म लिया और वहां जन्म लेने की वजह से इनका नाम शैलपुत्री पड़ा।

माता शैलपुत्री को पार्वती भी कहा जाता है और इनका विवाह भी भगवान शिव से हुआ-

माता शैलपुत्री का वास काशी नगरी वाराणासी में माना जाता है। जहां माता शैलपुत्री का एक प्राचीन मंदिर भी है, जहां माना है कि सच्चे मन से जाने वाले भक्त की सभी इच्छा पूरी हो जाती है। ऐसा भी कहा जाता है कि अगर वैवाहिक जीवन में कोई परेशानी चल रही है, तो आज के दिन माता शैलपुत्री के दर्शन करने से वे सभी कष्ट भी दूर हो जाते हैं।

माता शैलपुत्री का वाहन वृषभ है, इसलिए इन्हें वृषारूढ़ा भी कहा जाता है।

नवरात्रि में लगातार 9 दिनों तक आप “ॐ सर्वमंये उपागल मांगल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके शरण्ये त्रयम्बके गौरी नारायणी नमोस्तुते !!” मंत्र का जाप कर सकते हैं।

 

 

Load More Related Articles
Load More By Yuva Haryana
Load More In Breaking

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Check Also

पूर्व विधायक के भाई की सामने आई दादागिरी, बैंक के बाहर खड़े पुलिस कर्मी की पकड़ी कॉलर

Yuva Haryana, Bhiwani भिवानी जिले के जमालपुर हल्के के एक बैंक के बाहर हुए झगड़े का वीडियो व…