एसवाईएल को लेकर खत्म हो सकती है जंग, जानिये क्या है नया फार्मूला ?

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Sahab Ram, Yuva Haryana
Chandigarh, 26 June, 2018

हरियाणा की पिछले कई दशकों से एसवाईएल को लेकर लंबी कानूनी लड़ाई पंजाब के साथ चल रही है, और लगातार एसवाईएल के पानी को  लेकर को पंजाब का मुंह ताकना पड़ रहा है, लेकिन अब एसवाईएल के पानी का रास्ता आसान हो सकता है। इसके लिए हिमाचल मार्ग समिति के सदस्यों ने  हिमाचल के जरिये पानी आने का एक रास्ता सुझाया है।

जितेंद्र नाथ एडवोकेट और बलबीर सिंह जाखड़ ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपना सुझाव दिया है। उनके मुताबिक अगर हिमाचल प्रदेश के रास्ते से एसवाईएल का पानी हरियाणा में लाया जाता है, तो लागत भी कम आएगी और पानी को लेकर लड़ाई भी नहीं होगी।

इस समिति के सदस्यों ने पूरा रोड मैप तैयार किया है जिसको लेकर उन्होने मुख्यमंत्री, सांसदों, विधायकों और हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री और मंत्रियों से भी बात की है।

समिति के अध्यक्ष ने बताया कि इस रोडमैप के जरिये पंजाब की बजाय हिमाचल के रास्ते से पानी आसानी से लाया जा सकता है। क्योंकि पंजाब से 122 किलोमीटर की दूरी से तक पानी पड़ता है, लेकिन हिमाचल के रास्ते से यह दूरी सिर्फ 67 किलोमीटर ही पड़ेगी।

समिति के अध्यक्ष ने बताया कि जमीन अधिग्रहण को लेकर जहां पंजाब की करीब 26, 800 एकड़ भूमि पड़ती है वहीें हिमाचल के रास्ते से अगर लाते है तो भूमि अधिग्रहण को लेकर भी ज्यादा समस्या नहीं आने वाली। क्योंकि यहां पर किसानों की ज्यादा भूमि इस रोडमैप के हिसाब से एसवाईएल को बनाने को लेकर नहीं आएगी।

समिति के सदस्यों के मुताबिक इस प्रकार से अगर नहर का निर्माणा किया जाता है तो पहाड़ी इलाकों की जमीन आएगी, जो कि हिमाचल सरकार की संपत्ति है। वहीं हरियाणा-हिमाचल की सीमा पर स्थित बद्दी गांव से नहर का पानी टांगरी नदी तक आएगा और उसके बाद अंबाला जिले के जनसुई हैड पर आकर रुकेगा।

जनसुई हैड दक्षिणी हरियाणा तक नहरों का नेटवर्क भी सही है। ऐसे में एसवाईएल का पानी दक्षिण हरियाणा तक आसानी से पहुंच सकता है।

हालांकि एसवाईएल नहर को लेकर दशकों से राजनीति तो खूब होती आई है, लेकिन किसी प्रकार का सही सुझाव दोनों ही राज्यों की तरफ से अभी तक नहीं हुआ है। ऐसे में अब इस समिति के सुझाव को लेकर चर्चा संभव है।

 

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