गांव में नशे को ना रोकना सरपंच को पड़ा महंगा, कमेटी ने लगा दिया 5100 रुपये का जुर्माना

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Yuva Haryana

Fatehabad, 23 July, 2019

फतेहाबाद के गांव काजलहेड़ी में नशे के खिलाफ गठित की गई कमेटी ने अपने ही गांव के सरपंच पर नशा तस्करों की मदद करने पर 5100 रुपये जुर्माना लगाया है।

खास बात ये है कि गांव के सरपंच भूप सिंह की अगुवाई में ही पूरे गांव ने 26 सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया था जिसमें पूर्व सरपंच, पूर्व मैंबर सहित रिटायर्ड सरकारी कर्मचारी और कुछ गांव के पढ़े-लिखे मौजिज लोग शामिल किए गए।

कमेटी के सदस्य पूर्व सरपंच राम सिंह व जगतपाल ने बताया कि पूरे गांव की पंचायत में फैसला लिया गया था कि अगर गांव का कोई भी व्यक्ति पकड़े जाने वाले नशा तस्करों की जमानत लेता है या फिर अन्य किसी भी प्रकार से नशा तस्करी के आरोपियों की मदद करता है, तो उस व्यक्ति पर 5100 रुपये जुर्माना लगाया जाएगा और गांव के मुखिया यानि सरपंच के खिलाफ ही कमेटी के पास शिकायत पहुंची कि सरपंच ने नशा तस्करी में पकड़े गए 2 लोगों को पुलिस से छुड़वाया है।

रामसिंह व जगतपाल ने बताया कि कमेटी ने गांव की गोशाला में बैठक कर सरपंच पर 5100 रुपये जुर्माने का लिखित प्रस्ताव पारित किया और चौकीदार के जरिए सरपंच तक यह जुर्माने का लिखित फरमान पहुंचाया। फिलहाल सरपंच ने जुर्माना नहीं भरा है और सबूत देने की बात कमेटी को कही जा रही है।

वहीं कमेटी से अलग गांव के रहने वाले धर्मपाल का कहना है कि गांव काजलहेड़ी में नशा काफी फैला हुआ है और यहां कम उम्र के बच्चे भी नशे की चपेट में आ रहे हैं, जिससे देश का भविष्य गर्त में जा रहा है। हम चाहते हैं कि हमारा गांव नशामुक्त बने और पुलिस का हर तरह का सहयोग वे करने को तैयार है।

लेकिन बड़ी समस्या ये है कि तस्करों की सूचना जैसे ही पुलिस को दी जाती है तो पुलिस के आने से पहले ही सूचना नशा तस्करों तक पहुंच जाती है। ऐसे में बड़ा सवाल है कि ये लीकेज होता कहां है ? वहीं सरपंच पर जुर्माने के सवाल पर धर्मपाल ने कहा कि बड़ी हैरानी की बात है कि गांव के मुखिया ही कमेटी का गठन करते हैं और वही नशा तस्करों की मदद करते हैं।

इस तरह से नशे पर लगा पाना मुश्किल है। गांव के मुखिया को ऐसा करने से पहले सोचना चाहिए। वहीं इस पूरे मामले पर गांव के सरपंच भूप सिंह फौजी और फतेहाबाद पुलिस अपना पक्ष रखने से बच रही है, मीडिया के बार-बार संपर्क करने पर भी सरपंच उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं। फतेहबाद के एसपी विजय प्रताप सिंह ने पुलिस की मिलीभगत के सवाल पर कुछ भी बोलने से इंकार कर दिया है।

 

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