अखबार बेचकर अपने बच्चों को बनाया वैज्ञानिक, इंजीनियर और हॉलीवुड फिल्मों का स्क्रिप्ट राइटर

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Uttar Pradesh (10 April 2018)

कहते है शिक्षा सबसे बड़ा धन है। यह साबित कर दिखाया है चंदौली, उत्तरप्रदेश के कृष्णा गुप्ता के परिवार ने। गरीबी से चलते कृष्णा को कभी पान की गुमठी में बैठना पड़ा तो कभी अखबार बांटने पड़े। लेकिन पढ़ने की लगन ऐसी थी कि हर हालात में पढ़ाई जारी रखी और एम.कॉम किया।

काम के तौर पर कभी सिर पर तो कभी साइकिल पर अखबार ढोकर अपने पांचों बच्चों को पढ़ाया। उनका बड़ा बेटा आज जर्मनी में वैज्ञानिक है, मझला पुणे में इंजीनियर। बड़ी बेटी भी इंजीनियर है तो छोटी बेटी एमसीए (मास्टर ऑफ कम्प्यूटर एप्लीकेशन) की पढ़ाई कर रही है। वहीं सबसे छोटा बेटा हॉलीवुड फिल्मों की स्क्रिप्ट लिखता है।

बात 1969 के आसपास की है। कृष्णा गुप्ता कक्षा आठ में पढ़ रहे थे। पिता कचहरी में पान और स्टेशनरी की दुकान चलाते थे। पढ़ाई के दौरान दुकान पर बैठना पड़ता। दुकान पर कुछ पत्रकारों का जमावड़ा होता था, इससे उनके मन में पत्रकारिता से जुड़ने की इच्छा हुई।

कुछ दिन पत्रकारों के साथ घूमे और धीरे-धीरे लिखना पढ़ना शुरू कर दिया। उस दौरान के नामचीन अखबार से जुड़े तो शुभचिंतकों के जोर देने पर अखबार की एजेंसी ले ली। कृष्णा बताते हैं, तब रात भर काम करता था और तड़के ही घर आ पाता था। कुछ देर सोने के बाद भोर में ही उठकर पढ़ाई करता और फिर अखबार बेचने के लिए निकल पड़ता। स्कूल से आकर दुकान पर बैठना। बचपन में ही इतनी जिम्मेदारी कंधे पर आ गई। धीरे-धीरे उनकी गरीबी के बादल छंटते गए, एम.कॉम तक शिक्षा भी पूरी की।

कृष्णा गुप्ता अब भी अखबार बेचने का धंधा करते हैं। 15 लोगों को रोजगार भी दे रखा है। खुद भी हर रोज लगभग चार सौ रुपये का काम कर लेते हैं और दूसरों को भी कमाने का खूब मौका देते हैं।

 

 

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