नहीं रहे पूर्व मंत्री चौधरी श्याम चंद, बंसीलाल सरकार में किये ऐतिहासिक कामों के लिए हरियाणा करेगा याद

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Sahab Ram, Yuva Haryana
Chandigarh, 8 May, 2018

हरियाणा के कद्दावर नेता चौधरी श्याम चंद का आज 86 साल की उम्र में निधन हो गया । चौधरी श्याम चंद का जन्म सन 1932 में सोनीपत की गोहाना तहसील के लाठ गांव में किसान भोला राम के घर हुआ था। 2 साल की उम्र में ही इनके सिर से पिता का साया उठ गया। इसके बावजूद भी इन्होंने हिम्मत नहीं हारी और रात को जाग-जाग कर अपनी पढ़ाई पूरी की। कड़ी मेहनत की बदौलत चौधरी श्याम चंद ने दिल्ली और लंदन विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में एम.ए.की डिग्री और पत्रकारिता में डिप्लोमा पास किया।

अपनी मेहनत के बल पाया मुकाम
चौधरी श्याम चंद ने अपनी मेहनत के बल पर ही 1960 में भारतीय सिविल सेवा की परीक्षा पास की थी, वहीं 1965 में आईएएस के साक्षात्कार के लिए चुने गए । लेकिन इसी दौरान चयन ब्रिटिश सिविल सेवा के लिए हो गया और इंग्लैंड चले गए।

चौधरी श्याम चंद का राजनीतिक सफर
1966 में हरियाणा बनने के बाद ब्रिटिश सेवा से छुट्टी लेकर हरियाणा की राजनीति में कूद गए। 1967 में पहला चुनाव निर्दलीय के तौर पर लड़े, लेकिन जीत नहीं पाए। पंडित भगवत दयाल व राव विरेंद्र की सरकारें ज्यादा समय नहीं टिक पाई और एक साल के अन्दर ही मध्यावधि चुनाव की घोषणा हो गई ।

सन 1968 के चुनाव में विशाल हरियाणा पार्टी से मैदान में उतरे और जीत दर्ज की। इसी दौरान वो चौधरी बंसीलाल के संपर्क में आए और 1972 का चुनाव कांग्रेस पार्टी से लड़ा और 58 फीसदी वोटों के साथ सरकार में कैबिनेट मिनीस्टर बने। बाद में इन्होने कई चुनाव लड़े जिनमें सफलता नहीं मिली। राजनीति में इनकी योग्यता ही सबसे बड़ी कमजोरी साबित हुई ।

चौधरी श्याम चंद को योग्यता के आधार पर 8 बड़े विभागों की जिम्मेवारी मिली। इनमें आबकारी और कराधान, खाद्य एवं आपूर्ति, शहरीकरण, टाउन एंड कंट्री प्लानिंग, विकास मंत्री और समाज कल्याण मंत्री बने।

हरियाणा के सेल टैक्स कानून बनाने में इनकी अहम भूमिका था. चौधरी श्याम चंद्र ने अपनी कलम से ही इस कानून को लिखा था।

सन 1975 में आपातकाल के दौरान जब चौधरी बंसीलाल को केंद्र में बुलाने की चर्चा थी तो उसी दौरान चौधरी श्याम चंद्र को हरियाणा का अगला मुख्यमंत्री माना जाने लगा था। लेकिन बंग्लादेश के तत्कालीन राष्ट्रपति शेख मुजीबुर रहमान की हत्या के चलते दिल्ली के समीकरण बदले और  चौधरी श्याम चंद्र बनते-बनते रह गए।

इनके बड़े बेटे जस्टिस जितेंद्र चौहान पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में जज हैं, जबकि इनके छोटे बेटे डॉ. अशोक चौहान रोहतक पीजीआई में रजिस्ट्रार के पद पर कार्यरत हैं।

 

ये रही चौधरी श्याम चंद की उपलब्धियां

  1. वो हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू और संस्कृत भाषा के ज्ञाता थे।
  2. हरियाणा सेल्स एंड एक्ट ड्राफ्ट खुद हाथ से तैयार किया, लागू करवाया जिससे हरिायाणा का राजस्व तीन गुणा बढ़ा।
  3. हरियाणा व्यापार मंडल कांग्रेस समर्थन का गठन किया, इससे पहले व्यापार संघ आरएसएस का था।
  4. जेपी आंदोलन में एमएसपी सबसे पहले इन्होने लागू किया, उस समय पड़ोसी राज्य के किसा हरियाणा में फसलें बेचना चाहते थे।
  5. हूडा का निर्माण किया था जिसका हाल ही में नाम बदला गया है।
  6. पहली बार मेडिकल, इंजीनियरिंग, कानून,जेबीटी, बीएड 20 फीसदी अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षण का प्रावधान किया।
  7. 1972 में अनुसूचित जातियों के लोगोंके लिए अलग कॉर्पोरेशन बनाकर 4 फैक्ट्री लगाई।
  8. नौकरियों में पिछड़ी जातियों के लिए आरक्षण की व्यवस्था की ।
  9. तीन सबसे अमीर विभाग, मार्केटिंग बोर्ड, हूडा और टैक्सन.. ये तीनों विभाग खुद अपनी कलम से बनवाए।
  10. मंत्री बनते ही अपनी खरीदी हुई 10 एकड़ जमीन भूमिहीनों को दे दी थी।
  11. पीयू और कुरुक्षेत्र के लंबे समय तक सीनेट के सदस्य रहे थे।
  12. संयुक्त राष्ट्र संघ की इंडियन फैडरेशन के उपप्रधान रहे ।
  13. सोनीपत में डॉ. भीमराव अंबेडकर अस्पताल के फाउंडर थे।
  14. 1977 में कांग्रेस पार्टी के हारने के बाद जेल जाने से पहले तक कांग्रेस दफ्तर चलाया।
  15. साल 1985 में हरियाणा कांग्रेस के कार्यक्रम के संयोजक रहे।
  16. हरियाणा कांग्रेस के महासचिव भी रहे।
  17. विधायक और मंत्री बनकर अनेकों काम किये।

 

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