अधिकारियों को अब माननीयों की माननी होगी हर बात, जानिये क्या है आदेश

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Sahab Ram, Yuva Haryana
Chandigarh, 22 June, 2018
हरियाणा सरकार द्वारा प्रशासन और सांसदों एवं विधायकों के बीच आधिकारिक व्यवहार पर जारी दिशानिर्देश इस संबंध में भारत सरकार, कार्मिक मंत्रालय, लोक शिकायत और पेंशन विभाग द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार हैं।
एक सरकारी प्रवक्ता ने आज यहां यह जानकारी देते हुए बताया कि लोकसभा वेबसाइट पर उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, प्रोटोकॉल मानदंडों का उल्लंघन और लोकसभा के सदस्यों के साथ सरकारी अधिकारियों के अवमाननात्मक व्यवहार पर समिति ने लोकसभा में 4 जनवरी, 2018 प्रस्तुत अपनी दूसरी रिपोर्ट में सिफारिश की  है कि प्रशासन और सांसदों एवं विधायकों के बीच आधिकारिक व्यवहार पर समेकित दिशानिर्देशों का सभी सरकारी कर्मचारियों द्वारा सख्ती से पालन किया जाना चाहिए। दिये गये दिशानिर्देशों का कोई भी उल्लंघन गंभीरता से लिया जाएगा। सख्त अनुपालन के लिए इन निर्देशों को सभी अधिकारियों  एवं कर्मचारियों के नोटिस में भी लाया जाए।
सांसद एवं विधायक लोगों के मान्यता प्राप्त प्रतिनिधि के रूप में हमारे लोकतांत्रिक व्यवस्था में एक बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं। अपने कर्तव्यों के संबंध में, उन्हें अक्सर भारत सरकार या राज्य सरकार के मंत्रालयों या विभागों से जानकारी प्राप्त करना आवश्यक होता है या विचारार्थ सुझाव देते हैं या अधिकारियों के साथ साक्षात्कार की मांग करते हैं। संसद एवं विधायक और सरकारी कर्मचारियों के बीच संबंधों को नियंत्रित करने के लिए कुछ मान्यता प्राप्त सिद्धांत पहले ही स्थापित किए जा चुके हैं।
सांसदों एवं विधायकों के साथ अधिकारियों को सावधानीपूर्वक सही और विनम्र होना चाहिए और उनसे मिलने के लिए उठना चाहिए। क्षेत्र के सांसद को सरकारी कार्यालय द्वारा आयोजित सार्वजनिक कार्यों में हमेशा आमंत्रित किया जाना चाहिए। सार्वजनिक कार्यों में उचित और आरामदायक बैठने की व्यवस्था और डायस पर बैठने का उचित आर्डर होना चाहिए। यदि वे निर्वाचन क्षेत्र में आयोजित समारोह में भाग लेने के लिए अपनी सहमति व्यक्त करते हैं तो ऐसे निमंत्रण कार्ड और मीडिया कार्यक्रमों में उनके नाम शामिल किए जाने चाहिए।
अधिकारियों को उनकी अनुपस्थिति में राज्य विधायकों, सांसदों द्वारा उनके लिए छोड़े गए टेलीफ़ोनिक संदेशों को अनदेखा नहीं करना चाहिए और जल्द से जल्द संपर्क करने की कोशिश करनी चाहिए। इन निर्देशों में आधिकारिक मोबाइल फोन पर प्राप्त एसएमएस और ईमेल भी शामिल हैं जिनका तत्काल और प्राथमिकता के आधार पर उत्तर दिया जाना चाहिए।
सांसद द्वारा मांगी गई जानकारी दी जानी चाहिए बशर्ते ऐसी ही प्रकृति की जानकारी संसद में मांगी गई हो तो उसे इनकार न किया गया हो। सांसदों से पत्राचार करते समय यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि पत्र सुपाठ्य है और पूर्व मुद्रित या साईकलोस्टाईल उत्तरों को सावधानीपूर्वक टालना चाहिए। सांसद से प्राप्त प्रत्येक संचार की 15 दिनों के भीतर अभिस्वीकृति दी जानी चाहिए और इसके बाद पावती के अगले 15 दिनों के भीतर एक उत्तर दिया जाना चाहिए।
जहां अंतिम उत्तर भेजने में देरी की संभावना है या जहां किसी अन्य कार्यालय के किसी अन्य मंत्रालय से जानकारी प्राप्त की जानी है तो एक अंतरिम उत्तर एक महीने (संचार की प्राप्ति की तिथि से) के भीतर भेजा जा सकता है, जिसमें अंतिम उत्तर देने की संभावित तिथि का उल्लेख हो। यदि कोई पत्र गल्ती से किसी विभाग को भेज दिया जाता है तो उसे संबंधित पार्टी को सूचित करने के तुरंत बाद उचित विभाग को (सप्ताह के भीतर) भेजा जाना चाहिए।
सेवा के प्रत्येक सदस्य अपने कर्तव्यों के निर्वहन में एक विनम्र तरीके से कार्य करेंगे और जनता के साथ अपनी डीलिंग में टालमटोल नहीं करेंगे। जहां सरकारी कर्मचारियों को सांसदों और विधायकों को ध्यानपूर्वक सुनना चाहिए और सावधानीपूर्वक विचार करना चाहिए कि वह क्या कहना चाहता है, वहीं सरकारी कर्मचारी को हमेशा अपने स्वयं के फैसले और नियमों के अनुसार कार्य करना चाहिए।

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