रोडवेज यूनियनों ने किया बड़ा खुलासा, विभाग में हो रहा है तेल का घोटाला

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Sahab Ram, Yuva Haryana
Chandigarh, 23 Nov, 2018

निजीकरण के मामले को लेकर अब लगातार विरोध का सामना झेल रहे हरियाणा रोडवेज विभाग पर अब यूनियनों की पूरी तरह से नजर है। अब रोडवेज वर्कर्स यूनियन के पदाधिकारियों ने रोडवेज विभाग में अधिकारियों की मिलीभगत से तेल में घोटाला करने का आरोप लगाया है।

आॅल हरियाणा रोड़वेज वर्कर्स यूनियन के राज्य महासचिव बलवान सिंह दोदवा व डिपो प्रधान चन्द्रभान सोलंकी, सचिव महेंद्र मोहाली व मुख्य संगठन सचिव मजीद चौहान ने संयुक्त ब्यान जारी करते हुए बताया कि हरियाणा रोड़वेज के पंचकुला डिपो व सब डिपो कालका में अधिकारियों की मिलीभगत से डीजल के नाम पर भारी घौटाला चल रहा है। जिसके कारण परिवहन विभाग को हर महीने लाखों रुपए की चपत लग रही है। जिसका खुलासा 19 नवम्बर को डीजल की सप्लाई लेकर आए एक प्राईवेट टैंकर को अचानक चैक करने से हुआ।

महासचिव बलवान सिंह दोदवा ने बताया कि 19 नवम्बर को रात करीब नौ बजे एक प्राईवेट टैंकर न.HR-37B,6606 अम्बाला प्लान्ट से डीजल की सप्लाई लेकर कालका सब डिपो में आया था। उस समय ड्यूटी पर उपस्थित कर्मचारियों ने टैंकर को खाली करवाया था। टैंकर खाली होकर जैसे ही डिपो से बाहर जाने लगा तो कुछ कर्मचारियों ने शक के आधार पर टैंकर को रुकवाकर चैक किया तो पाया कि उसमें हजारों लीटर डीजल बचा हुआ था,जिसको टैंकर चालक लेकर चुपचाप निकल रहा था। मौजूदा कर्मचारियों ने टैंकर को नहीं जाने दिया तथा डिपो में ही खड़ा करवाकर महाप्रबंधक व कार्य प्रबन्धक को इसकी सूचना दी। पंचकुला डिपो के महाप्रबंधक ने अगले दिन सुबह आकर इस टैंकर को दौबारा खाली करवाया तो इसमें से 1331 लीटर डीजल और निकला जिसकी बाजारी किमत लगभग 90,000 रुपए बैठती है। लेकिन महाप्रबंधक ने बगैर कोई पुलिस व कानूनी कार्यवाही करवाए टैंकर को ऐसे ही छोड़ दिया। इससे साफ जाहिर होता है कि यह सारा मामला कर्मचारी व अधिकारियों की मिलीभगत के कारण एक लम्बे समय से चल रहा था। अगर यह टैंकर नही पकड़ा जाता तो यह काम लगातार जारी रहता।

अगर इसकी जांच तुरन्त किसी निष्पक्ष अधिकारी या जांच एजेंसी से करवाई जाये तो करोड़ों रुपए का एक बड़ा घोटाला निकलकर सामने आयेगा। युनियन ने मांग की है कि डीजल व स्पेयर पार्ट्स की जांच कालका, पंचकुला व चण्डीगढ़ डिपो में ही नहीं बल्कि प्रदेश के सभी डिपो व सब डिपुओं में होनी चाहिए ताकि रोड़वेज में होने वाले वास्तविक घाटे का पर्दाफाश हो सके।

दोदवा ने बताया कि परिवहन विभाग में मार्ग पर चलने वाले चालक को पांच या इससे ज्यादा के.एम.पी.एल लाने के लिए मजबूर किया जाता है तथा इससे कम लाने पर उनके वेतन से रिकवरी की जाती है। लेकिन सरेआम लाखों रुपए के घौटाले करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कोई कार्यवाही नही की जाती। दोदवा ने बताया कि परिवहन के उच्च अधिकारियों ने चालक व परिचालकों को एक वर्ष में 1.30 करोड़ रुपए ओवरटाइम के रूप में अदायगी करने का हवाला देकर बगैर सोचे समझे तथा स्टाफ की उचित व्यवस्था न करके ओवरटाइम बन्द करने तुगलकी फरमान जारी कर दिया। जिसके कारण यातायात व्यवस्था बिल्कुल अस्त व्यस्त हो गई। पुरे प्रदेश में अफरातफरी का माहौल है तथा प्रदेश की जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लेकिन सरकार ने जनता की परेशानी की कोई चिन्ता नहीं है।
दोदवा‌ ने बताया कि सरकार द्वारा चालक-परिचालक को ओवरटाइम की अदायगी कोई खैरात में नही थी बल्कि कर्मचारी हररोज लगातार 12 से 16 घन्टे ड्यूटी करके खुन पसीने की मेहनत से लेते हैं।

आज प्रदेश में बसों की वजह से जनता को जो भारी परेशानी हो रही है उसके लिए पुर्ण रुप से सरकार जिम्मेदार है न कि रोड़वेज कर्मचारी, क्योंकि स्टाफ की उचित व्यवस्था किये ऐसा फैंसला लेना कर्मचारी व जनहित में उचित नही था। लेकिन फिर भी हरियाणा रोड़वेज तालमेल कमेटी ने जनता को हो रही भारी परेशानी को देखते हुए 20 नवम्बर को हिसार में बैठक करके ‌फैंसला लिया है कि रोड़वेज कर्मचारी 4 जनवरी तक बगैर ओवरटाइम का लाभ लिए पहले की तरह पुरी रोटेशन में ड्यूटी करेगा। लेकिन सरकार 45 दिन में चालक-परिचालक की भर्ती करके स्टाफ की उचित व्यवस्था करे ताकि जनता को किसी भी प्रकार की परेशानी न हो। तालमेल कमेटी ने 20 नवम्बर को लिए गये फैंसले का पत्र सरकार को भेज दिया गया है।

 

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