ऑनलाइन बिक्री बनी किसानों के गले की फांस, फसल बेचने के लिए भूखे- प्यासे लंबी कतारों में करना पड़ रहा है इंतजार

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Yuva Haryana

Hisar, 9 April, 2019

हरियाणा सरकार की तरफ से किसानों की फसल को लेकर किए जा रहे तमाम दावे धराशाही होते नजर आ रहे हैं। लोकसभा चुनाव मे जहां सरकार किसानों को राहत देने और उनकी आए को दोगुना करने की बात कर रही है। वहीं ऑनलाइन बिक्री किसानों के गले की फांस बनी हुई है। किसानों को अपनी फसल बेचने के लिए लंबी- लंबी लाइन में लग कर भूखे प्यासे घंटों इंतजार करना पड़ता है।

बावजूद इसके डिजिटल इंडिया की बात करने वाली सरकार  प्रत्येक मंडी को फार्म अपलोड करने के लिए एक-एक लॉगिन आई- डी तक मुहैया नहीं करवा पाई। आदमपुर और हिसार की मंडी के लिए केवल एक ही लॉगिन आई- डी जारी की गई है जो एक समय में केवल एक ही मंडी से संचालित की जा सकती है।

किसानों की फसल का दाना- दाना खरीदने वाली सरकार केवल अब तक मेरी फसल मेरा ब्यौरा के तहत रजिस्ट्रेशन न करवाएं गए किसानों में से केवल मात्र 18 फार्म अब तक अपलोड कर पाई है। गौरतलब है कि हिसार मंडी में 78 गांव की फसल किसानों की तरफ से बेची जाएगी। लेकिन इसके लिए एक तो महज 5 दिन का समय दिया गया है, वहीं वेबसाइट का ना चलना और कर्मचारियों की कमी सरकार के तमाम दांवों की पोल खोलती नजर आ रही है।

अब बेचारा किसान करें तो क्या करें। एक तरफ जहां मौसम करवट ले रहा है, ऐसे वक्त में किसान अपने खेतों में पड़ी फसल को संभाले या फिर दरबदर अधिकारियों के चक्कर लगाकर अपनी कड़ी मेहनत से उगाई गई फसल का उचित दाम पर किसानों का कहना है कि ऑनलाइन फॉर्म जमा कराने के लिए उन्हें घंटों इंतजार करना पड़ता है और लंबी लाइनों में लगना पड़ता है।। यही नहीं एक किसान की अगर 25 क्विंटल से ऊपर सरसों है तो उसकी भी खरीद नहीं हो रही है। किसानों का आरोप है कि पटवारी और मार्केट कमेटी के अधिकारी उन्हें बार-बार चक्कर लगवा रहे हैं और सुबह से शाम तक वह ऑनलाइन करवाने के लिए कागजों में ही उलझ कर रह जाते हैं।

हिसार मार्केट कमेटी के सह सचिव मनदीप राणा का कहना है कि हिसार और आदमपुर की वेबसाइट का आईडी और पासवर्ड एक होने की वजह से देरी हो रही है।

उन्होंने कहा कि आदमपुर और हिसार की ऑनलाइन वेबसाइट में से एक ही आईडी चल पाती है जिसके कारण मात्र 1 दिन में 18 से 20 फार्म ही ऑनलाइन हो पाते हैं।

 

 

 

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