थाह नहीं पा सकते, कुछ ऐसा व्यक्तित्व था, सुनिये अटल के किस्से, धनखड़ की जुबानी,

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Sahab Ram, Yuva Haryana
Chandigarh, 16 August, 2018

देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी सच्चे किसान हितैषी थे और उन्होंने अपने कार्यकाल में इसे चरितार्थ भी किया। हरियाणा के कृषि एवं पंचायत विकास मंत्री ओपी धनखड ने वाजपेयी जी के निधन को अपूर्णीय क्षति बताते हुए कहा कि वे एक युग दृष्टा राजनीतिज्ञ और सच्चे किसान हितैषी थे।

यहां एक विशेष बयान में ओमप्रकाश धनखड़ ने कहा कि भारत के किसान का ब्याज का बोझ कम करने श्रेय अटल बिहारी वाजपेयी जी को जाता है। धनखड़ ने उनके साथ सांझा किए पलों को याद करते हुए कहा कि मुझे उनके प्रधानमंत्री रहते हुए प्रधानमंत्री निवास पर मंच संचालन का मौका मिला था जिसे वे कभी भुला नहीं पाएंगे। वे उस वक्त पाँच सौ किसान, फ़सली ऋ ण का ब्याज पहली बार 18 प्रतिशत से 9 प्रतिशत करने पर उनका धन्यवाद करने पहुँचे थे।

कृषि मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ ने कहा कि वाजपेयी जीे ने किसानों के लिये क्रेडिट कार्ड प्रारम्भ किया । देश का किसान उनको किसान क्रेडिट कार्ड देने वाले प्रधानमंत्री के रूप मे सदैव याद रखेगा। वर्तमान फ़सल बीमा के विचार उनके युग में प्रारम्भ हुआ था। किसानों ने तालकटोरा स्टेडियम में हज़ारों की संख्या मे आकर उनका आभार जताया था ।

धनखड़ ने उनदिनों विचार सांझा करते हुए बताया कि भाजपा कार्यालय अशोक रोड़ पर केंद्रीय पदाधिकारियों की बैठक हुई थी। मान्य प्रधानमंत्री वाजपेयी जी उपस्थित थे । पहले दिन शाम यूरिया के पाँच रूपये प्रति बैग भाव बढ़ाये गये थे । औपचारिक विषय पूरे होने पर वैकेया नायडू जी ने पूछा किसी ने कुछ और कहना है तब मैंने कहा कल यूरिया के दाम बढ़े हैं। किसानों पर बोझ बढ़ गया । किसान इससे ख़ुश नहीं हैं बढे हुए दाम की वापसी चाहते हैं, किसान । संघप्रिय गौतम जी ने भी मेरी बात का समर्थन किया बैठक समाप्त हो गई । बाद में वैकेयां नायडू जी ने मुझे अपने कक्ष मे बुलाया, डाँटते हुये पूछा आपने ये विषय क्यों उठाया ? मैंने सहजता से कहा आपने ही कहा, किसी ने कुछ तात्कालिक विषय पर कुछ कहना है तो कहें, तभी किसानों से जो जानकरी मिली वो कहा, उन्होंने कहा, प्रधानमंत्री जी को लगेगा मैंने तुम्हें कहने को कहा है। क्योंकि रास्ते मैंने उनसे यही निवेदन किया था । खास बात यह है कि उसी शाम को यूरिया के बढ़े भाव वापिस हो गये । जिससे वाजयेपी जी के हृदय में किसान प्रेम कितना था इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि वाजयेपी जी को प्रधानमंत्री ग्रामीण सडक़ योजना बोर्ड भी सदैव उनकी याद कराते रहेंगे । गाँव की सडक़ों के लिये पैसे देने वाले वो भारत के पहले प्रधानमंत्री थे।

स्वतंत्रता के लिए देश के वीरों के योगदान और देश की आजादी के बाद देश की सुरक्षा के लिए वीरों को बलिदान कभी नहीं भुलाया जा सकता। धनखड़ ने कहा कि वाजपेयी जी की सरकार के दौरान कारगिल युद्ध हुआ था। उस समय के सरकाा द्वारा कारगिल युद्ध के समय जवानों को दिये सम्मान व परिवारों की दी सहायता को कौन भुला सकता है ।वो सच्चे अर्थों मे जय जवान जय किसान कर रहे थे ।

सब रसों के वक्ता भी थे वाजपेयी
धनखड़ ने कहा कि उन्हें पूर्व प्रधानमंत्री अटल वाजपेयी वाजपेयी के प्रधानमंत्री काल में वेंकैय्या नायडू जी की अध्यक्षता में पार्टी के राष्ट्रीय सचिव के रूप में, कार्य करने का मौक़ा मिला। इसलिए उन्हें निकट से सुनने का कई बार अवसर मिला। धनखड़ ने कहा कि मेरे अब तक के जीवन काल के वो सर्वश्रेष्ठ वक़्ता थे, उनके भाषण मे कविता के समान ही सब रस होते थे। हर कविता एक नए अर्थ और भाव के साथ बांधती थी। हास्य, करूण, वीरता की उनकी कविताएं उललेखनीय हैं। । लखनऊ मे उनके राष्ट्रीय परिषद की बैठक मे हुये भाषण की चर्चा समाचार पत्रों ने ऐसे ही की थी, उनके भाषण मे सब रस थे ।

थाह नहीं पा सकते
धनखड़ ने कहा कि उनकी गहराई की थाह पाना सम्भव नहीं था, आप अपनी बात रख सकते थे , ध्यान से सुन लिया यही,सबके लिये पर्याप्त था । हम हरियाणा भाजपा की टीम चौटाला जी से गठबंधन मे 35 सीटें मिले इसका तर्क लेकर प्रधानमंत्री निवास गये । रामबिलास जी, मनोहर लाल जी व औमप्रकाश ग्रोवर जी के साथ पक्ष रखने का दायित्व मुझ पर था । मैंने सब बातों विस्तार से उनकी सीट साथ खड़े होकर रखी, सब बातों को सुनने के बाद उन्होंने उपर मेरी और देखा तथा बस इतना ही कहा कहा बड़ी तैयारी से आये हो ।

सत्य कभी एक तरफ़ा नही होता
उनकी सबसे बड़ी ख़ूबी यही थी वह जीवन के इस सत्य को बख़ूबी जानते थे, सत्य कभी एक तरफ़ा नही होता। आप जो भी पक्ष रखते वो उसका दूसरा पक्ष सहजता से सामने रख देते थे । किस्सा जबका है जब चौटाला जी की सरकार बनी हम हरियाणा भाजपा टीम, कुछ तकलीफ़े बताने प्रधानमंत्री कार्यालय गये । उन्होंने सहजता से कहा जिन राज्यों मे भजपा शासित सरकारें है । वहाँ के अन्य दल आप जैसी ही शिकायतें लेकर आते हैं ।

हँसते हँसते सब कहने का कौशल
धनखड़ ने कहा कि वाजपेयी जी में हंसते हुए सब कुछ कह देने का अनूठा कौशल था। बंसीलाल जी की सरकार से समर्थन वापिस लेने के बाद हम प्रधानमंत्री जी के निवास पर मिलने गये। रामबिलास ने समर्थन वापसी की जानकारी कही , उन्होंने हँसते हुये कहा गिरा तो सकते हो -पर अपनी चला भी सकते हो?

प्रधान मंत्री से निवृत होने के बाद उनके प्रीणी मनाली स्थित निवास पर जगत प्रकाश नड्डा जी, मनोहर लाल जी और मैं मिलने गये, मनोहर लाल जी ने कहा ऐसे छुट्टी के माहौल मे पहली बार मिल रहे हैं । उन्होंने हँसते हुये कहा हाँ बस अब हो गई छुट्टी ।

पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की तीन तीन दिन की बैठके होती थी । वाजपेयी जी हर शब्द ध्यान से सुनते कोई प्रतिक्रिया नही । आखरि़ी पैंतीस चालीस मिनट का उदबोद्धन इस वाक्य से प्रारम्भ होता, ज़ोरदार चर्चायें हुई है, शेष उदबोद्धन किसी अन्य उच्चें धरातल पर होता ।

उनकी अधिकांश कविताये उन्हीं को सम्बोधित है । हार नही मानूँगा – रार नही ठानूँगा । उनका खुद का नेतृत्व करती व्यक्त होती है । उनका आत्म नेतृत्व करते हुये , वो समष्टि का नेतृत्व करने लगती है । छोटे मन से कोई बड़ा नही होता – टूटे मन से कोई खड़ा नही होता ।
शरीर नही रहा पर परंतु उनकी कविता व उद्बोधनों के रूप में, नेतृत्व शाश्वत रहेगा। सदियों तक पीढीयों का मार्गदर्शन करता रहेगा।

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