Home Breaking बिना मिट्टी के सब्जियों का उत्पादन कर रहे बीए पास दो छात्र, सोशल मीडिया से लिया था आइडिया

बिना मिट्टी के सब्जियों का उत्पादन कर रहे बीए पास दो छात्र, सोशल मीडिया से लिया था आइडिया

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Vijender Baba, Jind

पिता को खेत में अंधाधुंध कीटनाशकों का स्प्रे देखा, तो दोस्त के साथ जैविक सब्जियों की खेती करने का आइडिया आया। घर के आगे आंगन में खाली पड़ी करीब 80 गज जमीन पर हाइड्रोपोनिक्स तकनीक से सब्जियां उगाना शुरू किया। हम बात कर रहे हैं अहिरका गांव निवासी दीपक और उसके दोस्त पटियाला चौक निवासी अरूण की। बीए तक पढ़ाई करने वाले दोनों दोस्तों को इसका आइडिया सोशल मीडिया पर एक वीडियो देख कर आया।

इस तकनीक में खास बात ये है कि सब्जियां उगाने के लिए मिट्टी की जरूरत नहीं है और पानी की खपत भी ना के बराबर है। आंगन में प्लास्टिक की पाइपों में नेटपोट रख कर नारियल के बुरादे में सब्जियां लगाई गई हैं। इन सब्जियों को पकाने में ढाई से तीन महीने का समय लगेगा और इस दौरान केवल 200 लीटर पानी की खपत होगी। इसके लिए 200 लीटर की पानी की टंकी रखी हुई है। जिसमें कूलर में प्रयोग होने वाले मोटर पंप लगाया गया है, जिससे पानी पाइपो में जाता है और वापस इसी टंकी में घूम कर आ जाता है।

शुरुआत में आया था दो लाख का खर्च

दीपक ने बताया कि इस तकनीक से शुरुआत में करीब दो लाख रुपये खर्च आया है। लेकिन इसके बाद लागत ना के बराबर है। ना तो किसी कृषि यंत्र की जरूरत है और ना ही कीटनाशक स्प्रे की। इस जगह को नेट (प्लास्टिक की जाली) से कवर किया गया है, जिससे बाहर से कोई कीट फसल पर ना आए। ए के आकार में स्टैंड बनाया गया है, जिस ऊपर से नीचे तक प्लास्टिक की पाइप लगाई गई हैं और इनमें निश्चित दूरी पर गोल आकार में कट लगा कर उसमें नेटपोट रखे गए हैं। जिसमें लेटस जिसे स्लाद पत्ता बोला जाता है, टमाटर, धनिया व लाल शिमला मिर्च लगाई हुई हैं। जिनकी मार्केट में डिमांड ज्यादा रहती है और रेट भी अच्छे मिलते हैं।

बिना मिट्टी और खाद के तैयार हो रही है सब्जियां

अरूण ने बताया कि इस तकनीक में सबसे जरूरी पीएच मान और पानी का टीडीएस होता है। नारियल के बुरादे का पीएच मान शून्य होता है। जबकि मिट्टी का पीएच मान अलग-अलग होता है। इसलिए नारियल का बुरादा प्रयोग किया जाता है। वहीं सब्जी को अलग-अलग स्टेज पर कम व ज्यादा टीडीएस के पानी की जरूरत होती है। टमाटर, धनिया, लेटस व शिमला मिर्च के पौधे 20 से 25 दिन के हुए हैं, उनमें करीब 50 टीडीएस का पानी प्रयोग किया जा रहा है। पौधे को सारे पोषक तत्व पानी से ही मिलते हैं। किसी प्रकार की खाद भी इसमें डाली नहीं जाती है। खरपतवार का भी कोई झंझट नहीं होता।

देखने के लिए आसपड़ोस में आ रहे हैं काफी लोग

दीपक के परिवार के आर्थिक हालात ज्यादा अच्छे नहीं हैं। पिता राजेश के पास जमीन बहुत कम है, उसमें खेती से परिवार का गुजारा मुश्किल था। इसलिए फूड वैन लगाने लगे। दीपक ने बताया कि उनकी इस तकनीक को देखने के लिए शहर व आसपास के गांवों से काफी संख्या में लोग आते हैं। उन्होंने ट्रेनिंग भी देना शुरू कर दिया है। खासकर शहर में लोगों के पास सब्जी उगाने के लिए जगह नहीं होती। इस तकनीक से वे छत्त पर 25 से 30 गज जगह पर भी जहर मुक्त सब्जियां उगा कर खा सकते हैं। सामान्य तकनीक की तुलना में पौधे की ग्रोथ भी ज्यादा है और उत्पादन भी ज्यादा होता है। उनका उद्देश्य ये मैसेज देना है कि जिसके पास जमीन नहीं है, वो भी खेती कर अच्छी आमदनी ले सकता है।

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