8 साल की उम्र में किया गया था बाल विवाह, अब समझमें आई यह कुप्रथा, तो इस पर जंग जीत कर ली अपनी पसंद से शादी

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Shweta Kushwaha, Yuva Haryana

Panipat, 23 Nov, 2018

बाल- विवाह एक ऐसी कुप्रथा है जो पूरे देश में ही पुराने समय से प्रचलित है, जिसे लोग आज भी फॉलो करते हैं। हालांकि पहले से देखा जाए, तो अब लोगों की सोच में भी बदलाव आया है और एक लड़की के जीवन पर बाल विवाह का कितना दुष्प्रभाव पड़ता है यह भी लोगों को अब समझ आने लगा है।

लेकिन आज भी देश के कई स्थानों पर बाल विवाह किया जाता है। ऐसा ही एक मामला पानीपत से सामने आया है, जहां 18 साल की एक लड़की की 8 साल पहले ही शादी करवा दी गई थी। बड़े होने तक जब इस लड़की को समझमें आया कि यह कुप्रथा है, जिसे बढ़ावा नहीं देना चाहिए, उसने डेढ़ साल पहले लेने आए ससुरालियों के साथ जाने से इंकार कर दिया।

जिसके बाद पूरा मामला कोर्ट में गया। कोर्ट ने बाल विवाह को रद्द कर दिया और लड़की ने अब अपनी पसंद से शादी भी कर ली है। जिसमें लड़की के परिवार वालो ने भी उसका साथ दिया।

क्यों करना पड़ा था बाल विवाह-

2008 में शशि के चाचा की शादी नहीं हो रही थी और जिस लड़की से चाचा की शादी पक्की की गई, उसके भाई से शशि की शादी तय की गई क्योंकि उन्होंने यह शर्त रखी थी कि हम अपनी बेटी की शादी तभी करेंगे, जब आप हमारे बेटे से अपनी बेटी की शादी करेंगे। शशि उस समय महज 8 साल की थी, अस समय शादी का अर्थ भी शायद वह नहीं समझती थी।

लेकिन जब शशि 11वी में थी तो उसके स्कूल में एक सेमिनार हुआ, जिसमें बताया गया था कि बाल विवाह एक कुप्रथा है और जिसे तोड़ा भी जा सकता है। जिसके बाद शशि ने फैसला लिया कि वह इस शादी को नहीं मानेगी। जब ससुराल वाले उसे लेने आए, तो शशि ने अपने पिता को साफ मना कर दिया, जिसमें परिवार वालों ने भी उसका साथ दिया।

इस दौरान शशि और उसके परिवार वालों को काफी कठिनाईयों का सामना करना पड़ा। शशि ने 2017 में महिला संरक्षण एवं बाल विवाह में भी शिकायत की, जहां ससुरालियों को बुलाया गया, लेकिन वह नहीं माने। जिसके बाद कोर्ट में शादी खत्म करने के लिए केस किया गया। लेकिन इस दौरान शशि और उसके परिजनों पर कई तरह के दबाव भी डाले गए।

ससुरालियों ने इतना तक कह दिया कि चाचा की पत्नी यानि उनकी बेटी को वह लेकर जा रहे हैं और जब तक वह शशि को नहीं भेजेंगे, तब तक वह भी अपनी बेटी को नहीं भेजेंगे। चाचा से रिश्ता तोड़ने की भी धमकी उन्होंने दी। इसके साथ शशि को ससुराल भेजने के लिए पंचायत भी हुई, जब उनकी नहीं मानी, तो समाज से बेदखल कर दिया गया।

इतना ही नहीं उनकी पुश्तैनी जमीन को भी हड़प लिया गया। परिवार के लोगों ने 360 गज जमीन भी हड़प ली। लेकिन कोर्ट द्वारा इस पर सुनवाई करते हुए शादी को रद्द कर दिया गया। पिता ने इस दौरान बेटी का पूरा साथ दिया। इस समय पिता बलकार किराए के मकान में पानीपत में रह रहे हैं। लेकिन वह अपने इस निर्णय से काफी खुश है।

 

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