पानीपत के इशांक के जन्म से पैर नहीं, फिर भी इस कमजोरी से पार पाकर शूटिंग में जीत लिए 4 मेडल

खेल हरियाणा विशेष

कहते है कुछ करने का जज्बा हो तो मंजिल मिल जाती है। बस उसे करने की हिम्मत और लग्न होनी चाहिए। यह कहानी है 26 साल के इशांक की। इशांक की जन्म से ही दोनों टांगे नहीं हैं। भले ही वह आम आदमी की तरह चल-फिर नहीं पाते हैं, पर उनके जैसा कारनामा कर पाना आम आदमी के लिए भी आसान नहीं है।

पानीपत के खैल बाजार में रहने वाले इशांक चार साल पहले इतने बीमार हुए कि 7 महीने तक बिस्तर पर पड़े रहे। इसी दौरान इशांक ने दिव्यांगों के संघर्ष की कहानियां सर्च की और पता चला कि वह खेल ही है, जिससे इस दिव्यांगता को हराया जा सकता है।


इशांक ने एक ऐसा खेल चुना जिसमे उनकी दिव्यांगता बीच में ना आए, इसलिए उन्होंने राइफल शूटिंग जैसे खेल में पसीना बहाया। मेहनत और प्रैक्टिस से 10 मीटर राइफल शूटिंग में राष्ट्रीय स्तर तक पहुँच गये। जहां से 4 मेडल जीत चुके हैं। इशांक हरियाणा व्हीलचेयर बास्केटबॉल टीम को भी लीड कर रहे हैं और रग्बी भी खेलते हैं।

इशांक पांच-पांच गेम खेलते हैं। यहीं से उन्होंने नई राह पकड़ ली। इशांक जैसे तैसे द्रोणाचार्य शूटिंग स्पोर्ट्स एकेडमी तक पहुंच गए। वे वहां रोज ट्राइसाइकिल से जाते थे। वहां पहुंचते-पहुंचते पसीने से तर-बतर हो जाते थे जिसके बाद कोच ने मेहनत को देख इशांक के स्कूटी दी ।

खर्चा निकालने के लिए वे प्रैक्टिस के बाद सनौली रोड पर पिताजी की डेयरी की दुकान पर काम करते है। इशांक की पांच गेम खेलने की इच्छा है। फिलहाल व्हीलचेयर शूटिंग, रग्बी और बॉस्केटबॉल खेल रहे है। चौथे गेम के रूप में तैराकी भी सीख रहे है। वे बताते है कि फिलहाल पांचवें गेम का चुनाव तरना बाकि है।


इशांक ने दिव्यांगता के कारण बहुत सी मुसीबते झेली है। 20 जनवरी 2018 को हरियाणा रोडवेज के कंडक्टर ने महज इसलिए बस से उतार दिया, क्योंकि उनके पास व्हीलचेयर थी। तो वहीं 2016 में शूटिंग जैकेट न होने पर प्रतियोगिता से बाहर कर दिया गया। और बास्केटबॉल टीम का कैप्टन होने के बावजूद इशांक के पास ओरिजनल व्हीलचेयर नहीं है।

लेकिन वे आज हरियाणा व्हीलचेयर बास्केटबॉल टीम के कप्तान हैं। साथ ही उन्होंने 10 मीटर राइफल शूटिंग 2017 में ऑल इंडिया मावलंकर चैंपियनशिप के स्टैंडिंग वर्ग में गोल्ड मेडल जीता। इंशाक जैसे लोग ही साबित करते है कि हौंसलो से उड़ान है और मेहनत की सफतला की कुंजी।

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