भिवानी का प्रवीन लागत एवं प्रबंधन लेखाकार की परीक्षा में रहा उत्तर भारत में अव्वल, देश में तीसरा स्थान

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भिवानी शहर से तीन किलोमीटर दूर स्थित गांव उमरावत का प्रवीण कभी पांच हजार की नौकरी करता था, मगर अब वही प्रवीण पांच-दस-बीस या पचास नहीं, बल्कि लाखों का पैकेज लेगा। प्रवीण दत्त शर्मा ने लागत एवं प्रबंधन लेखाकार यानी CMA की परीक्षा को पास किया है। गांव के एक साधारण से परिवार में जन्मे और छोटे से घर में रहने वाले प्रवीण दत्त शर्मा ने जिस कदर मेहनत कर इस मुकाम को पाया शायद कोई ही उसे हासिल कर पाते हैं।

गांव के स्कूल से 10वीं व गांव मानहेरू के स्कूल से 12वीं की पढ़ाई पास कर बीकॉम करने वाले प्रवीण दत्त ने TCI यानी ट्रांसपोर्ट कारपोरेशन ऑफ इंडिया में काम करना शुरू किया तब उनकी तनख्वा महज पांच हजार रुपये थी। उससे ज्यादा ट्रेंड युवाओं को ऑफिसर रैंक में देखकर उसे भी आगे बढऩे की चाहत पैदा होती थी। हालांकि टीसीआई में प्रवीण खुद से ज्यादा पढ़े लिखों को ट्रेनिंग देता था। साल 2003 में बीकॉम, 2010 में एमकॉम और 2011 में एमबीए करने के बाद 2012 में सीएस एक्जीक्यूटिव और इसके साथ ही सीएमए इंटर की परीक्षा पास की तो हाल ही में CMA फाइनल की परीक्षा ना केवल पास की, बल्कि समूचे उत्तर भारत में पहला व देश में तीसरा रैंक हासिल किया।

प्रवीण ने सात साल ट्रांसपोर्ट की नौकरी करने के बाद सीएमए कोर्स में दाखिला लिया। दस साल बाद इंटरमीडिएट का एग्जाम व इसके पांच साल बाद मुख परीक्षा में भी देश भर में तीसरा व उत्तर भारत में पहला रैंक हासिल कर गांव व प्रदेश का नाम रोशन किया।
प्रवीण के अनुसार गांव देहात के युवा टीचर, फौज या फिर एसएससी की तैयारी करते है लेकिन CMA की ओर कोई नहीं जाना चाहता, जबकि यह परीक्षा कम ही पास कर पाते है और इसमे न तो रिजर्वेशन व ना ही ज्यादा खर्च लिए आता है। जहां एमबीए इत्यादि करने के लिए लोग बीस से तीस लाख रूपये तक खर्च कर देते है, वही सीएमए का पूरा ही खर्च ही मात्र बीस पच्चीस हजार तक का है।

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