11 दुश्मनों को मौत के घाट उतारकर शहीद हुआ था यह पवित्र सिंह जवान, जानिए यह विशेष कहानी-

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Ajay Lohan, Yuva Haryana

Narnaud, 26 July, 2018

देश का नाम रोशन करने के लिए और दुश्मन को दांतों तले ऊँगली दबाने पर मजबूर करने के लिए देश के सैनिकों ने कारगिल के युद्ध में पाकिस्तान को धूल चटाई थी। लेकिन देश का नाम रोशन करते करते अनेक सैनिक शहीद हो गए और वीरगति को प्राप्त हो गए।

जिनमे से एक था गांव मिलकपुर का शहीद पवित्र सिंह। आइए आज याद करते है उस महान योद्धा सैनिक को जिसने हस्ते हस्ते अपने प्राण देश के लिए न्योछावर कर दिए।

फोज में भर्ती होने का जो जूनून इस शहीद में था, वेसा जुनून शायद ही किसी बच्चे में देखने को मिले। इसके पिता स्वर्गीय किताब सिंह भी फोजी थे और जब भी वो घर आते थे, तो शहीद पवित्र सिंह उनसे खिलोनो में भी बंदूक की ही मांग करते थे। जब उसके पापा उसके लिए बंदूक ले आते, तो वो बचपन में भी कहता था कि पापा मैं भी बड़ा होकर फोजी बनूंगा और आपकी तरह देश की शरहद पर दुश्मनों को मारकर देश की सेवा करूंगा।

शहीद पवित्र सिंह ने दसवी की परीक्षा गावं मिलकपुर के ही सरकारी स्कूल से की और उसके बाद बारहवीं कक्षा राखी के सरकारी स्कूल से की।  इसके बाद वो पढ़ते पढ़ते फोज में भर्ती हो गए और बचपन के अपने सपने को साकार कर दिखाया। शहीद पवित्र की मां व उसके परिजन उसके जन्मदिन और सहादत पर हर वर्ष खेल करवाते है। उनके नाम से बच्चो के अनेक देशभक्ति के कार्यक्रम करवाए जाते हैं।

शहीद पवित्र सिंह में बचपन से ही राष्ट्र प्रेम कुछ इस तरह से कूट कूटकर भरा हुआ था कि भरी जवानी गवाने वाले इस सिपाही ने मरने से पहले दुश्मनों के दांत खट्टे कर दिए। दुश्मन दल के 11 लोगों की जान लेकर ही उसने अंतिम सांस ली और वीरगति को प्राप्त हुआ।

छोटे से गांव मिलकपुर के इस नोजवान शहीद पवित्र सिंह पर आज भी न केवल उसके परिजनों और जाट रेजिमेंट व सम्पूर्ण राष्ट्र को गर्व है।

9 अगस्त 1978 में मिलकपुर गांव में जन्मे पवित्र ने अपनी प्राथमिक शिक्षा गांव में ही ग्रहण करने के बाद पास के ही गांव राखी साहपुर में आगे की पढ़ाई के लिए कदम रखा।  पर पिता से मिले जज्बे ने जोर मारा और उन्ही के नक्से कदम पर चलते हुए मार्च 1996 में 8 जाट रेजिमेंट में भर्ती हुए।

उनकी माता सुजानी देवी ने बताया कि उनका बेटा बचपन से ही बहादुर था और देश की सेवा करना चाहता था इसलिए पढ़ते पढ़ते फोज में भर्ती हुआ । उसे ये प्ररेणा उनके पिता से मिली क्योंकी उनके पिता भी फोज में ही थे।  उनकी माता ने बताया की उन्हें इस बात पर गर्व है की उनके बेटा देश के 11 दुश्मनों को मारकर शहीद हुआ है । उन्होंने इच्छा जताई की पवित्र जेसे बहादुर देश पर मर मिटने वाले बच्चे सभी माताओ की कोख से पैदा हो ताकि देश की सेवा कर सके।

शहीद पवित्र के भाई प्रदीप बताते है की पवित्र कुमार बचपन से ही विनम्र सभाव के थे। घर वाले अगर किसी बात पर गुस्सा हो जाते थे, तो पवित्र कुमार उसका जवाब हंसते हुए देते थे। 1985 में जब उसके पिता किताब सिंह 7 केवलरी आर्मी से सेवानिव्रत हुए तब उनसे ही उसने सेना में भर्ती होने व देश की सेवा करने का जज्बा पैदा हो गया।

दादा सुल्तान सिंह ने बताया कि देशसेवा का जज्बा उसे अपने पिता से विरासत में मिला था ।  दुसरे शब्दों में यह कहा जा सकता है कि फोजी पिता के घर जन्म होने के कारण उसके संस्कार में ही राष्ट्र प्रेम की भावना भर गई थी।

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