जो बलिदान दिया तुमने , उसके हम ऋणी सहृदय हैं

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@ चेतना शर्मा

क्या 15 अगस्त मात्र एक सरकारी अवकाश मात्र है। नही यह मात्र एक सरकारी अवकाश मात्र नही बलकि हमारे वीर स्वतंत्रता सेनानियों की वीरगाथा का दिन है प्रत्येक हिन्दुस्तानी चाहे वह हिंदू हो, मुस्लिम हो, सिख हो अथवा ईसाई हो पूरे दिन मे एक बार अवश्य अपने स्वतंत्रता सेनानियों को स्मरण करता है ,चाहे वह गरम दल से ताल्लुक रखता हो अथवा नरम दल से। परन्तु हृदय में केवल एक ही जज्बा होता है कि आज वह स्वतंत्र भारत के नागरिक है उसके अपने अधिकार ,कुछ नीति निदेशक सिद्धांत है जिनका कोई भी अपने स्वार्थ के लिए हनन नहीं कर सकता ।

हम अपनी नई पीढ़ी को उन स्वतंत्रता के नायको की वीरगाथाए सुना दिखाकर उनका स्मरण दिलाते है । जिन्हे उन्होने कभी देखा नही उन्हे वह अपने इर्द गिर्द महसूस कर सके। इसका स्मरण उन्हे केवल इसी दिन ही नही प्रत्येक श्वास के साथ रहना आवश्यक है। जिस स्वतंत्र भारत का वह अभिन्न अंग है उसकी नीव इन्ही स्वतंत्रता सेनानियों ने अपने हाथों से रखी थी ।कुछ ने सत्य अहिंसा का मार्ग अपनाया और कुछ ने अपने अमूल्य जीवन का बलिदान दिया। सैंकड़ो आंदोलन किए गए । असंख्य लोगों पर लाठियां भांजी गई ,जलियावाला बाग नरसंहार को कौन भूल सकता है । कितने वीर सपूतो को फांसी पर चढ़ा दिया गया । महात्मा गांधी ,लाला लाजपत राय ,बाल गगांधर तिलक ,नेता जी सुभाषचन्द्र बोस ,भगत सिहं ,राजगुरु ,चन्द्रशेखर आजाद,उधमसिहं सभी ने केवल एक ही स्वपन देखा “स्वतंत्र भारत” तब जाकर इस स्वतंत्रता का स्वाद चखा था हम भारतीयों ने ।

उन भारतीयों को और इस दिवस को हमारा शत् शत् नमन।।

जो बलिदान दिया तुमने ,

उसके हम ऋणी सहदृय है।

जो व्याधिया ,क्लेश ,विषाद ,

यंत्रणा ,संताप ,उत्पीड़न ,

सहे तुमने ।

उसके कृतार्थ सहदृय है।

इस स्वतत्रतां के तुम जनक ,

देयता हम सर्वत्र तुम्हारे है ।

हे वीर सपूत भारत माता के,

तुम शत् शत् नमन योग्य हो ,

केवल एक दिवस मात्र नही,

तुमको स्मरण करने के लिए ।

हर श्वास तुम्हारी ऋणी है,

तुम रक्षक ,प्राणदाता ,तुम ठाकुर

मेरे हो ।।

-चेतना शर्मा

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