भीम अवार्डी अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ी गुरमेल हैं नौकरी को लेकर हताश, देश को दिलवाया है कई बार पदक जीत कर सम्मान

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Shweta Kushwaha, Yuva Haryana

Kaithal, 30 August, 2018

कैथल के गांव धनौरा की बेटी 26 वर्षीय भीम अवार्डी गुरमेल नौकरी को लेकर बेहद ही हताश हैं। 18 सालों में गुरमेल देश के लिए काफी पदक जीत चुकी हैं, लेकिन वह रोजगार और अन्य सुविधाओं से वांछित है।

इस बात से गुरमेल के परिजन भी काफी निराश हैं। उनका कहना है कि 18 सालों से खेल जगत में कई पदक देश के नाम करने वाली गुरमेल को अगर आर्थिक मदद नहीं मिलेगी, तो वह कैसे आगे बढ़ेगी ?

परिजनों का कहना है कि सरकार सिर्फ दावे करती है, लेकिन अब तक उनकी बेटी के प्रति कुछ भी कदम नहीं उठाया गया है। उन्होंने बताया कि हैंडबॉल में गुरमेल का 2007 में सबसे कम उम्र की खिलाड़ी की तौर पर इंडिया की टीम में चयन हुआ था। तब से लेकर अब तक वह पढ़ाई के साथ कढ़ी मेहनत करती आ रही है।

गुरमेल ने बताया कि वह अपने घर में 4 बहनें हैं और उनका एक भाई है। उनके माता- पिता पर उन सभी की परवरिश का भार है और परिवार की आय के लिए कृषि के अलावा कोई संसाधन नहीं है। मां और नानी ने उसके खेलों में आगे बढ़ने के लिए अपने गहने तक बेचे थे।

वे कहती हैं कि सालों तक कई मेडल हासिल करने के बाद भी सरकार द्वारा कोई सम्मान नहीं मिला है, उससे वह काफी निराश हैं।

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