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Saturday, September 19, 2020

हरियाणवी खिलाड़ियों ने रचा इतिहास ,18वें एशियाड गेम्स में जीते कई मेडल

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हरियाणा के खिलाड़ियों ने एशिया गेम्स में अपनी मेहनत का फल बखूबी लिया। खेल चाहे शूटिंग हो ,ज्वेल्लिंग थ्रो हो या महिला खिलाड़ियों की बात हो। कहीं भी हरियाणा वासी पीछे नहीं हटे और गोल्ड से लेकर कांस्य पदक अपने नाम किये। ऐसा करके इन खिलाडियों ने अपने प्रदेश का ही नहीं बल्कि पुरे देश का नाम रोशन किया।

 

नीरज चोपड़ा

पानीपत के गांव खंडरा ज्वेलिन थ्रो के खिलाड़ी नीरज चोपड़ा एशियन गेम्स में देश को गोल्ड हासिल करने में कामयाब रहे। किसान सतीश व सरोज के पुत्र नीरज ने ऑस्ट्रेलिया में राष्ट्रमंडल खेलों में पहेली बार भारत के लिए ज्वेलिन थ्रो में गोल्ड मैडल जीता था।

 

 

 

अरपिंदर सिंह

अरपिंदर मूलरूप से तो अमृतसर से हैं लेकिन खेले हमेशा से ही हरियाणा की तरफ से।पंजाब में खेलों की सुख सुविधाएं ना मिलने पर हरियाणा में रहने लगे।चार सालों से ही हरियाणा की तरफ से खेलते आ रहे है अरपिंदर के पिता जगबीर सिंह खेती-बाड़ी करते हैं।

 

 

 

अमित पंघाल

सेना में नौकरी करने वाले अमित पंघाल रोहतक के गांव मायना के रहने वाले है। अमित ने 2007 में खेलना शुरू किया था और 2009 में सबजूनियर नेशनल में गोल्ड जीतकर सबको चौंका दिया था। अब एशियन गेम्स में भी गोल्ड जीतकर देश का नाम रोशन कर दिखाया।अमित का परिवार गांव में ही रहता है और उनके पिता किसान है।

 

 

 

 

विनेश फोगट

महिला रेसलिंग का जाना माना नाम विनेश फोगट आज किसी परिचय का महोताज नहीं है। दादरी के गांव बलाली में विनेश फोगाट ने आज पुरे देश में महिला रेसलिंग में अपना नाम बना चुकी है। एशियन गेम्स में गोल्ड जीतकर पुरे देश का नाम रोशन किया।

 

 

 

 

बजरंग पुनिया

1994 में जन्मे बजरंग पुनिया ने सात साल की उम्र में अखाड़ों मे कदम रखा।बजरंग ने 2006 में महाराष्ट्र के लातूर में हुई स्कूल नेशनल चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता था। उसी के बाद बजरंग पुनिया लगातार आगे बढ़ते गए और अब 2018 में एशियाड में पहला गोल्ड मैडल देश की झोली में डाला।

 

 

मंजीत सिंह

 मंजीत सिंह जींद से है और एसियन खेलों के दसवें दिन ही देश को गोल्ड जिताया। 18 साल से अपने खेल का अभ्यास कर रहे मंजीत सिंह चहल को अब जाकर सफलता प्राप्त हुई है। बता दें की, मंजीत ने छह माह तक घर से दूर रहकर अभ्यास किया। साथ ही मंजीत सिंह इस कामयाबी के पीछे अपने पिता रणधीर सिंह चहल का हाथ मानते हैं।

 

 

 

संजीव राजपूत

जगाधरी में 5 जनवरी 1981 को जन्मे निशानेबाज संजीव राजपूत ने पुरुषों की 50 मीटर राइफल-3 पोजीशन में रजत पदक हासिल किया ।18 साल की उम्र में नाविक के रूप में भारतीय भारतीय नौसेना को ज्वाइन किया था। 2018 एशिया खेलों में 50 मीटर राइफल 3 स्थितियां वर्ग में रजत पदक जीता ।पदक जितने के बाद आशीष ने कहा कि अब मुझे नौकरी मिलने कि उम्मीद है।

 

मेजर आशीष मालिक

आशीष को वर्ष 2002 में इंडियन मिल्ट्री कॉलेज देहरादून में आठवीं कक्षा में दाखिला दिलवाया था। जिसके बाद से ही इनकी रूचि घुड़सवारी में हुई। 2008 में एनडीए उत्तीण किया और वर्ष 2009 में सेना में लेफ्टिनेंट भर्ती हुए वर्ष 2015 से मेरठ में मेजर के पद पर कार्यरत है ।आशीष की मां उर्मिला देवी शिक्षा विभाग में डीपी के पद पर कार्यरत है और पिता शिक्षा विभाग से पिछले साल प्रवक्ता के पद से सेवानिवृत हुए हैं।

 

 

लक्ष्य श्योराण

लक्ष्य श्योराण जींद के रहने वाले हैं और इस बार एशिया के खेलों में हिस्सा लिया।लक्ष्य में इंटरनैशनल स्तर पर भी दर्जनों पदक देश के लिए हासिल किए हैं। लक्ष्य देश के लिए भविष्य में गोल्ड जरूर लेकर आएगा। शूटिंग में देश के लिए 19 वर्ष की आयु में लक्ष्य ने सबसे पहला पदक जीता है ।लक्ष्य श्योरण ने 2014 में शूटिंग की शुरूआत की थी। 2015 में कुवैत में हुई एशियन चैंपियनशिप में सिल्वर पदक जीता था। इसके बाद 13वीं अंराष्ट्रीय प्रतियोगिता इटली में सिल्वर, थाइलेंड में हुई सातवीं इंटरनेशन जूनियर कप प्रतियोगिता में सिल्वर पदक जीता। 2016 में वर्ल्ड कप में कांस्य पदक जीता। जुलाई 2017 में जर्मनी में हुई इंटरनेशन कप प्रतियोगिता में कांस्य पदक जीता। फिनलेंड में 2017 में हुई नौंवी जूनियर कप प्रतियोगिता में सिल्वर पदक जीता। इसी साल मार्च में सिडनी में हुए जूनियर वल्र्ड कप में भी लक्ष्य में कांस्य पदक जीता है। लक्ष्य कई राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में गोल्ड मेडल जीत चुका है। लक्ष्य के पिता सोमबीर पहलवान अपनी दुपहिया वाहनों की एजेंसी चलाते हैं और वे भारत कुमार रह चुके हैं।

 

रानी रामपाल

भारतीय हॉकी की ‘रानी’ कहलाती हैं। 2010 विश्व कप में भाग लेने वाली भारतीय हॉकी टीम की वे सबसे कम उम्र की  खिलाड़ी थीं। रानी ने 14 साल की उम्र में अपना पहला इंटरनेशनल मैच खेला। इसके बाद 2010 में 15 की उम्र में वो महिला विश्व कप में सबसे युवा खिलाड़ी बनी।  2009 में एशिया कप के दौरान भारत को रजत पदक दिलाने में अहम भूमिका निभाई।2010 के राष्ट्रमंडल खेल और 2010 के एशियाई खेल के दौरान भारतीय टीम का हिस्सा थीं।2013 में जूनियर महिला हॉकी टीम ने कांस्य पदक जीता जो कि विश्व कप हॉकी प्रतिस्पर्धा में 38 साल बाद भारत का पहला कोई मेडल है। इस जीत का श्रेय रानी रामपाल और मनजित कौर का है। वह आमतौर पर सेंटर फॉरवर्ड पर खेलती हैं।वहीं इस बार एशिया गेम्स में खेलकर भारतीय टीम हॉकी को रजत पदक जिताया।

 

नवजोत कौर

भारत की फ़ील्ड हॉकी में 2016 ग्रीष्मकालीन ओलम्पिक में हिस्सा लेने वाली महिला खिलाड़ी है।न्यूजीलैंड के खिलाफ जारी पांच टेस्ट मैचों की श्रृंखला के चौथे टेस्ट मैच में शुक्रवार को नवजोत ने यह उपलब्धि हासिल की। साल 2012 में न्यूजीलैंड के ही खिलाफ खेली गई श्रृंखला में नवजोत ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपने करियर की शुरुआत की थी। इससे पहले, उन्होंने जूनियर टूर्नामेंटों और नीदरलैंड्स के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय अंडर-21 टूर्नामेंट में अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया था। इस टूर्नामेंट में भारत को तीसरा स्थान हासिल हुआ था। इस बार एशिया गेम्स में खेलकर भारतीय टीम हॉकी को रजत पदक जिताया।

 

सविता पुनिया

सविता सिरसा जिले के गांव जोधकां में 11 जुलाई 1990 को पैदा हुई। पिता महेंद्र पूनिया फार्मासिस्ट हैं। मां लीलावती हाउसवाइफ हैं तो भाई भविष्य बी-टैक के बाद कंप्यूटर शॉप चला रहा है। स्कूलिंग के दौरान ही सविता का खेलों की ओर रुझान हो गया था। सविता स्कूल से पढ़कर घर वापस आती और अपने खेत के टेढ़े-मेढ़े रास्तों पर खेलती थी। इस खेल में उसकी चचेरी बहन मंजू ने भी हमेशा उसकी मदद की। दो-तीन साल बाद ही कमर दर्द की वजह से मंजू ने भी सविता का साथ छोड़ दिया लेकिन वह खेलती रही। अपने प्रदर्शन की बदौलत ही सविता इस मुकाम तक पहुंच पाई।

 

मोनिका मालिक 
ये भारतीय फील्ड हॉकी खिलाड़ी हैं। जिन्होंने 2014एशियाई खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व किया और कांस्य पदक जीतने वाली टीम 
का हिस्सा थी। साथ ही मोनिका भारतीय रेलवे में नियोजित है।



नवनीत कौर  

नवनीत एशियाई कप में जापान की टीम के खिलाफ हैट्रिक लगा चुकी है साथ ही इनके पिता और कोच को भरोसा था की वह अपने देश का नाम रोशन कर के ही वापस लौटेंगी।हरियाणा की इन सभी खिलाडियों ने रजत पदक जीता और पुरे देश का नाम रोशन किया।

 

 

 

 

 

सुरेंद्र पालड़

कुरुक्षेत्र के रहने वाले अंतर्राष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी 27 वर्षीय है और खेलते समय वह अपनी टीम के लिए जान तक लगा देते हैं। सुरेंद्र ने कई राष्ट्रीय और विश्व प्रतियोगिताओं में भाग लेकर अपने खेल का प्रदर्शन करते हुए ना जाने कितनी बार देश को मेडल दिला चुके हैं।
सुरेंद्र एक छोटे से किसान मलखान सिंह के बेटे है और मात्र 6 साल की उम्र में हॉकी जीवन की शुरुआत की।

 

 

सरदारा सिंह 

15 जुलाई 1986 सिरसा में जन्मे  भारत के फिल्ड हॉकी  खिलाड़ी  सरदारा सिंह  मिडफील्डर के स्थान पर खेलते हैं। भारत सरकार ने 2012 में सरदार को अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया। 2008 के अजलनशाह टूर्नामेंट में पहली बार टीम का नेतृत्व करके देश के सबसे युवा हॉकी कप्तान बन गए। वर्तमान में  भारतीय हॉकी टीम के कप्तान हैं।और जाकर्ता में हुए एशियन खेलों में खेल कर भारत को कांस्य पदक जिताया।

 

 

 

विकास कृष्ण यादव

26 वर्षीय भारतीय मुक्केबाज विकास कृष्ण यादव जिन्होंने जकार्ता में एशियन गेम्स 2018 में 75 किलोग्राम वेट की कैटेगरी में ब्रॉन्ज मेडल जीता है। वे गोल्ड मेडल जीत सकते थे, लेकिन क्वार्टर फाइनल में विकास को बाई पलक पर चोट लगने के कारण सेमीफाइनल खेलने से अयोग्य करार दिया गया है। ग्वांग्झू में 2010 में लाइटवेट 60 किग्रा में गोल्ड जीता था । इसके बाद 2014 में इंचियोन में मिडिलवेट

में ब्रॉन्ज मेडल देश को दिलाया। उन्हें प्री क्वार्टर फाइनल में चोट लगी थी और क्वॉर्टर फाइनल में उनका घाव गंभीर हो गया।

 

अभिषेक वर्मा

पलवल के अभिषेक वर्मा ने देश को दस मीटर एयर पिस्टल स्पर्धा में कांस्य पदक जीत कर देश-प्रदेश का नाम रोशन किया।

 

 

 

दुष्यंत चौहान

झज्जर के दुष्यंत चौहान ने नौकायन में देश को कांस्य पदक जिताया ,दुष्यंत ने कहा कि ये खेल मैंने अपनी जिंदगी की अंतिम रेस समझकर खेला था ।बता दें, कि खेल के दौरान दुष्यंत के शरीर में पानी की कमी हो गयी थी। उन्हें काफी सर्दी और जुखाम भी था। जिससे उन्होंने सुबह से लेकर बस दो ब्रेड और एक सेब ही खाया था।इसे लेकर उनकी रेस पर असर पड़ा और अंत में उन्हें स्ट्रेचर पर ले जाना पड़ा।

 

 

 

 

 

 

सीमा पुनिया

27 जुलाई 1983 सोनीपत के गांव खेवड़ा में जन्मी सीमा पुनिया ने देश को थ्रो डिसकस में कांस्य पदक जिताया। बता दें, की सीमा पुनिया गोल्डन गर्ल के नाम से भी जानी जाती हैं। 19 वर्ष की आयु में सीमा ने अपना खेल का करियर शुरू कर दिया था।

 

 

 

 

प्रदीप नरवाल

गोहाना के रिंढ़ाणा निवासी प्रदीप नरवाल निरवाल कबड्डी अकादमी में खेलते हैं साथ ही एशिया गेम्स में खेलकर कांस्य पदक जीता और देश का नाम रोशन किया इनका सबसे घातक हथियार डुबकी हैं इसलिए इन्हे डुबकी किंग के नाम से भी जाना जाता है।प्रदीप कबड्डी लीग में सीजन-5 में पटना पायरेट्स के कप्तान हैं ।इनका जन्म 16 फरवरी 1997 में हुआ था।

 

 

संदीप नरवाल

गोहाना के गांव कथूरा में जन्मे संदीप नरवाल एक अध्भुत और बेहतरीन खिलाड़ी हैं। इनके कड़े अभ्यास ने निरंतर ऊंचाइयों तक पहुंचाया।
संदीप ने 22 साल की उम्र में प्रो कबड्डी लीग में शानदार चौतरफा प्रदर्शन के साथ कबड्डी की दुनिया में कदम रखा था साथ ही एशिया खेलों में संदीप ने कांस्य पदक जीता।

 

 

 

दीपक निवास हुड्डा

गांव चमरिया के रहने वाले दीपक निवास हुड्डा ने इस बार देश को कांस्य पदक दिलाया। 2016 में गोहावटी में साउथ एशिया मुकाबले में देश को दीपक ने गोल्ड दिलाया था। बता दें की इन्होंने प्रो कबड्डी लीग के पहले तीन सत्रों में भी हिस्सा लिया है।

 

 

 

 

नरेंद्र ग्रेवाल

हिसार जिले के गांव सातरोड़ के नरेंद्र ग्रेवाल ने इस बार देश को कांस्य पदक से जिताया। इससे पहले भी नरेंद्र ने कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक हासिल किया। बता दें की नरेंद्र वुशू के खिलाड़ी हैं।

 

 

 

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