तेजाब पीड़ितों के लिए विशेष राहत और पुनर्वास नीति बनाई सरकार ने, 2011 से मानी जाएगी लागू

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हरियाणा सरकार ने 18 वर्ष तक की तेजाब पीड़ित लड़कियों, महिलाओं और लड़कों को तदर्थ राहत या चिकित्सा प्रतिपूर्ति और पुनर्वास सेवाएं उपलब्ध करवाने के लिए तेजाब पीडि़त महिलाओं और बच्चों के लिए राहत एवं पुनर्वास नामक योजना शुरू की है।

2 मई 2011 के बाद तेजाब हमले से कोई भी पीड़ित इस योजना के तहत पात्र होगा।

जहां तेजाब पीडि़त का अंतिम रूप से पूरा उपचार नहीं हुआ और उपचार की सभी प्रक्रियाएं समाप्त हो गई, तो इस तरह के पीडि़त को लगातार उपचाराधीन माना जाएगा। हरियाणा में रहने वाले 18 साल तक के सभी तेजाब हमले पीडि़त लड़कियों, महिलाओं और लड़कों को इस योजना में शामिल किया जाएगा। ऐसे मामले, जहां पीडि़त स्वयं आवेदन करने में अक्षम है, तो ऐसी स्थिति में उनकी ओर से दावा करने वाले उनके उत्तराधिकारी या पीडि़त दोनों में से किसी एक द्वारा आवेदन भरा जाएगा।

प्रदेश का कोई भी तेजाब हमले से पीडि़त व्यक्ति किसी भी सरकारी या सरकार द्वारा स्वीकृत अस्पताल में शत-प्रतिशत निशुल्क चिकित्सा उपचार प्राप्त करने का पात्र होगा।

संबंधित जिले के मेडिकल बोर्ड से प्रमाणित अनुसार अक्षम व्यक्तियों की श्रेणी में गंभीर तेजाब पीडि़त व्यक्ति का इलाज किया जाएगा। विकलांगता की परिभाषा में आने वाले तेजाब पीडि़त को 8000 रुपये की मासिक वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। इसके अतिरिक्त, तेजाब हमले के पीडि़त को खाद्य एवं आपूर्ति विभाग द्वारा उचित मूल्य की दुकानों के आबंटन में अधिमान दिया जाएगा।

ऐसी घटना के 15 दिनों के भीतर तेजाब पीडि़त को एक लाख रुपये की राशि की अदायगी की जाएगी, जिसमें सम्बन्धित उपायुक्त द्वारा तेजाब पीडि़त को तुरंत तदर्थ राहत के रूप में 25,000 रुपये तथा महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा 15 दिनों के भीतर 75,000 रुपये की राशि दी जाएगी ताकि उसे चिकित्सा उपचार व खर्च की सुविधा प्रदान की जा सके। प्रदेश के तेजाब हमला पीडि़त व्यक्ति दवाई, भोजन, बैडिंग, प्लास्टिक या रीकन्स्ट्रक्टिव सर्जरी सहित सरकारी या सरकारी अनुमोदित अस्पतालों से  शतप्रतिशत निशुल्क चिकित्सा उपचार प्राप्त करने का हकदार होगा। महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा राशि की प्रतिपूर्ति की जाएगी।

सरकारी स्वामित्व या निजी स्वामित्व का कोई भी अस्पताल या विशेषज्ञता वाला अस्पताल किसी भी स्तर पर किसी भी पीडि़त को विशेष या किसी भी प्रकार के उपचार से इनकार नहीं करेगा। ऐसी चिकित्सा सुविधा के लिए पीडि़त को उपचार के लिए लाया जाएगा तो अस्पताल तत्काल जिला बोर्ड या राज्य बोर्ड और उसकी पुलिस को सूचित करेगा, लेकिन किसी भी स्तर पर पीडि़त को इलाज से इनकार नहीं करेगा। इलाज के लिए पुलिस रिपोर्ट या एफआईआर की कोई पूर्व शर्त नहीं होगी।

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