आर्थिक आधार के आरक्षण के तहत हो चुकी भर्तियों की ज्वाइनिंग पर रोक हटी, 1369 युवाओं की ज्वाइनिंग का रास्ता साफ

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Sahab Ram, Yuva Haryana
Chandigarh, 18 May, 2018

हरियाणा में सामान्य वर्ग के आर्थिक आधार पर पिछड़ों के लिए दिए गए आरक्षण को लेकर आज पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने एक स्पष्टीकरण जारी किया जिससे करीब 1370 युवाओं की सरकारी नौकरियों में विभिन्न पदों पर नियुक्ति का रास्ता साफ हो गया है।

हरियाणा सरकार की तरफ से ईबीपीजी को नौकरियो में दिए गए 10 प्रतिशत आरक्षण को हाईकोर्ट की डबल बेंच की तरफ से 7 दिसम्बर को आदेश जारी कर स्टे कर दिए गया था। हालांकि इन आदेशों के बाद हाईकोर्ट में एक अपील फाइल की गई थी जिसमे कोर्ट को बताया गया था कि जिन मामलो में भर्ती प्रक्रिया अंतिम दौर में थी, उन पर भी रोक लगा दी गई थी।

इसी मामले में अब हाई कोर्ट ने शुक्रवार को दायर एप्लिकेशन पर अपने ही आदेशो को स्पष्ट करते हुए हरियाणा सरकार और हरियाणा स्टाफ सिलेक्शन कमीशन को आदेश जारी किया है ।

हालांकि EBPG के आरक्षण पर लगे स्टे पर हाईकोर्ट में जारी रहेगी। स्टे लगने के बाद घोषित हुई भर्तियों और भविष्य के लिए इस बारे में कोर्ट का फैसला अभी नहीं आया है।  एक सच यह भी है कि सितंबर 2016 से अब तक हरियाणा सरकार ने अदालत में यह जवाब दाखिल नहीं किया है कि वो आर्थिक आधार पर दिए गए आरक्षण के समर्थन में है या खिलाफ।

शुक्रवार को जारी आदेश में हाईकोर्ट ने कहा है जिस भर्ती पर विज्ञापन या नोटिफिकेशन जारी हो चुका था, उन्हें इबीपीजी कोटे की नौकरी दे दी जाए। इस मामले में याचिकाकर्ता वकील गोबिंद पराशर ने बताया कि हाईकोर्ट ने हरियाणा और एचएसएससी को ये आदेश जारी किए है। हाई कोर्ट के इन आदेशों का फायदा 1369 युवाओ को फायदा होगा। काबिलेगौर है कि 2016 में दाखिलों पर स्टे कालिंदी वशिष्ठ की याचिका पर किया गया था। इस याचिका में इबीपीजी कोटे के दाखिलों पर रोक लगाने के आदेश कोर्ट से हुए थे।

प्रदेश में आर्थिक आधार पर सामान्य वर्ग के लोगों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण सितंबर 2013 में हुड्डा सरकार के समय लागू हुआ था। पंचकुला निवासी कालिंदी वशिष्ठ की अपील पर 7 दिसंबर 2017 को हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने इस आरक्षण पर रोक लगा थी। इसकी वजह से कई विभागों में चयनित युवा ज्वाइन करने से रह गए। कोर्ट में पहुंचे लोगों ने तर्क दिया कि एक ही भर्ती के कुछ लोग इस आरक्षण के तहत ज्वाइन कर चुके हैं लेकिन कुछ कोर्ट के स्टे की वजह से ज्वाइन नहीं कर पाए। साथ ही यह भी बताया गया कि गुजरात के एक केस में सुप्रीम कोर्ट ने भी इस तरह से ज्वाइनिंग से वंचित रहे उम्मीदवारों के पक्ष में निर्णय लिया था।

नियुक्ति पर कोर्ट द्वारा लगाई गई रोक हटवाने के लिए हरियाणा सरकार ने मजबूती से पक्ष रखा। सरकार द्वारा सामान्य वर्ग के आर्थिक आधार पर पिछड़े युवाओं के हित में किए गए प्रयासों पर आज ब्राह्मण समाज के लोगों ने हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल व हरियाणा के शिक्षा मंत्री राम बिलास शर्मा का आभार व्यक्त किया।

 

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