सांसदों के वेतन की तर्ज पर बढ़े फसलों का समर्थन मूल्यः बीरेंद्र सिंह

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Deepak Khokhar, Yuva Haryana
Rohtak, (31-3-2018)
केंद्रीय इस्पात मंत्री बीरेंद्र सिंह ने महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी में हुई संगोष्ठी में सांसदों की तर्ज पर फसलों का समर्थन मूल्य बढ़ाए जाने की वकालत की है।
उन्होंने कहा कि न्यूनतम समर्थन मूल्य के स्तर में पुनर्विचार की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि संसद में किसान की बात को उठाने वाले बहुत कम सांसद हैं, जो किसान की बात उठाते हैं उनकी बात को भी गौर से नहीं सुना जाता। 
खेती की आर्थिक व्यवहार्यता विषय पर हुई संगोष्ठी में उन्होंने किसानों से जुड़े तमाम प्रकार के मुद्दे उठाए।
उन्होंने इस बात का खास तौर पर जिक्र किया कि 1 अप्रैल से सांसदों का वेतन बढ़ाया गया है।
पहले तो सांसद और विधायक खुद ही वेतन बढ़ा लेते थे लेकिन अब नया प्रावधान किया गया है।
एक बॉडी बनाई गई है जिसके तहत महंगाई और अन्य चीजों का आंकलन होता रहेगा और उसके हिसाब से हर 5 साल बाद बिना किसी सिफारिश के वेतन बढ़ता रहेगा।
केंद्रीय मंत्री ने सवाल किया कि क्या इस तरह का प्रावधान फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य के लिए नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसानों को फसल का लाभकारी मूल्य अवश्य मिलना चाहिए।
उन्होंने आर्थिक विषमता का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि देश में गरीबी से बड़ी समस्या आर्थिक विषमता है और यही विषमता लोकतंत्र के लिए बड़ा खतरा भी है। उन्होंने कहा कि जिस देश में विषमता हो, वह देश ज्यादा देर तक टिक नहीं सकता।
उन्होंने कहा कि इस देश में आर्थिक तौर पर वही संपन्न है जो खेती से हटकर कोई काम करता है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि बैंक, किसान पर एतबार करें। बीरेंद्र सिंह ने अन्न उत्पादन के क्षेत्र में हरियाणा व पंजाब की तारीफ की।

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