कभी स्कूल में सिर्फ 20 बच्चे पढ़ते थे, सरकार स्कूल बंद करवाना चाहती थी, टीचर्स की लगन से अब हुए 300 छात्र

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Jaipdeep Rathi, Yuva Haryana

Sonipat, 5 Sep, 2018

देश मे सरकारी स्कूलों के हालात बहुत अच्छे नहीं है। जहां सरकारी स्कूलों में टीचर्स की कमी है, तो वहीं स्कूलों की इमारतें भी जर्जर हालत में मिलती है। लेकिन सोनीपत के बसौदी गांव के लोगों ने अपने प्राइमरी स्कूल को बचाने के लिए खुद के पैसों से स्कूल की इमारत का बनवाया और सरकारी स्कूल में टीचर्स की कमी को पूरा करने के लिए 9 प्राइवेट टीचर भी स्कूल में लगा दिए।

बता दें कि कुछ साल पहले सोनीपत के बसौदी गांव के प्राइमरी स्कूल की हालत बेहद खस्ता थी। यहां केवल 28 छात्र ही पढ़ने आते थे और यहां के हैडमास्टर ने स्कूल बंद करने की बात कही।

उस समय इस गांव के लोगों ने स्कूल को बचाने के लिए एक समिति का गठन किया और खुद के पैसों से स्कूल में चार नए कमरें बनवाये और सरकारी स्कूल में छात्रों को पढ़ाने के लिए 9 प्राइवेट टीचर्स भी रख लिए। अब इस स्कूल में छात्रों की संख्या 300 का आंकड़ा पार कर चुकी है।

बच्चों को स्कूल में लाने और ले जाने के लिए दो बस भी खरीद रखी है। वहीं स्कूल में लगे प्राइवेट टीचर्स और ड्राइवरों की सैलरी के लिए गांव के छात्रों से साल में महज 2500 व बाहर गांव से आने वाले छात्र- छात्राओं से 5000 रुपए सालाना फीस ली जाती है। जो प्राइवेट स्कूलों की फीस के मुकाबले बेहद कम है।

इन्ही पैसों से स्कूल का रख रखाव का काम भी किया जाता है। अब इस प्राइमरी स्कूल को मीडिल स्कूल बनाने की मांग उठने लगी है। लेकिन यह काम सरकार की मंजूरी के बिना संभव नहीं है। वहीं स्कूल में पढ़ने वाले बच्चे अपने स्कूल की व्यवस्थाओं को लेकर काफी खुश हैं। उनका कहना है कि उन्हे अंग्रेजी माध्यम से अध्यापक पढ़ाते है। वे इस स्कूल में शिक्षा ग्रहण कर काफी खुश हैं।

इस स्कूल के हैडमास्टर राजकुमार कुमार ने बताया कि ग्रामीणों की मदद से स्कूल बेहद अच्छा चल रहा है और यह स्कूल पूरी तरह इंग्लिश मीडियम है। जबकि प्रदेश के दूसरे सरकारी स्कूलों में ऐसा नहीं होता।

प्राइवेट स्कूलों के मुकाबले यहां बेहद कम फीस है, जबकि यहां के छात्र किसी भी मायने में पीछे नहीं हैं। छात्र भी यहां पूरी लगन से पढ़ते देखे गए। जबकि इस स्कूल में दों ही सरकारी टीचर हैं और चार पद यहां खाली पड़े हैं। गांव के लोगों ने अपने पैसे से यहां 9 प्राईवेट अध्यापकों को नौकरी पर रखा है, बस की सुविधा भी दी है। अकेले बसौदी गांव के ही नहीं आसपास के गांवों के बच्चे भी यहां पढ़ने के लिए आते है।

 

 

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