ई-ट्रेडिंग के विरोध में अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हरियाणा भर के आढ़ती

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Yuva Haryana

Chandigarh, 10 April, 2019

प्रदेश भर की अनाज मंडियों के आढ़ती आज से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं। आढ़तीयों का कहना है कि अगर विरोध के बावजूद सरकार नहीं मानी, तो 15 अप्रैल को करनाल में महारैली का आयोजन किया जाएगा। दावा किया गया कि इसमें प्रदेश भर से हजारो की संख्या में आढ़ती शामिल होंगे, आढ़ती लंबे समय से ई-ट्रेडिंग का विरोध कर रहे हैं। इनका कहना है कि ई-ट्रेडिंग से उनका कारोबार खत्म हो जाएगा और वह बेरोजगार हो जाएंगे।

करनाल की अनाज मंडी के प्रधान रजनीश चौधरी ने कहा सरकार हमें जबरदस्ती ई-ट्रेडिंग से फसल खरीदने का दबाव डाल रही है, जिसका हम विरोध कर रहे है।

मंडी प्रधान ने कहा आढ़तीयों और किसानों का लम्बे समय से लेन- देन चल रहा है, किसी भी किसान को आढ़तीयों से कोई भी शिकायत नहीं है। फिर भी सरकार ई-ट्रेडिंग से फसल खरीदने का दबाव डाल रही है। अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठे आढ़तीयों ने कहा अगर सरकार ने हमारी मागे नहीं मानीं तो 15 अप्रैल को करनाल में महारैली का आयोजन किया जाएगा और महारैली के माध्यम से सरकार के खिलाफ विरोध जताया जायेगा।

वहीं अनाज मंडी में पहुंचे किसानों को भी आढ़तीयों की अनिश्चितकालीन हड़ताल से काफी परेशानी का समाना करना पड़ेगा। किसानो ने कहा आढ़ती और किसान दोनों एक हैं, किसानो को मंडी में फसल लाने से पहले पैसे की जरुरत होती है।

वहीं,  ई ट्रेडिंग के विरोध में व्यापारियों की ओर से आज फतेहाबाद अनाज मंडी को बंद रखा गया। व्यापारियों की ओर से फसल की कोई भी खरीद नहीं की गई। व्यापारी मंडी के गेट के बाहर धरने पर बैठ गए और नारेबाजी की।

व्यापार मंडल के प्रधान सुभाष मुंजाल ने बताया कि सरकार के द्वारा ई ट्रेडिंग के मार्फत फसल की खऱीद करवाई जा रही है। जिसके विरोध में पूरे प्रदेश के व्यापारी हड़ताल पर हैं। उन्होंने बताया कि ई ट्रेडिंग के विरोध में व्यापारियों के द्वारा 14 अप्रैल तक हड़ताल की जाएगी।

अगर फिर भी सरकार के द्वारा निर्णय को वापस नहीं लिया गया तो 15 अप्रैल को करनाल में प्रदेश स्तर पर व्यापारियों का एक सम्मेलन होगा और उसमें बड़े आंदोलन का ऐलान किया जाएगा।

व्यापारियों ने कहा कि ई ट्रेडिंग के रोष स्वरूप उनके द्वारा धरना दिया जा रहा है और किसी भी फसल कि कोई भी खरीद नहीं की जा रही। फिलहाल मंडी में गेहूं की फसल आने में अभी समय लगेगा, लेकिन अगर व्यापारियों का गुस्सा इसी कदर आगे भी जारी रहता है तो आने वाले दिन किसानों के लिए भी मुश्किल भरे हो सकते हैं।

 

 

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