सातवें वेतन आयोग को लेकर खफा हुए कॉलेज शिक्षक, आंदोलन का किया ऐलान

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Yuva Haryana
Chandigarh, 20 Sept, 2018

हरियाणा के उच्चतर शिक्षा विभाग द्वारा सातवें वेतन आयोग को लागू करने की कार्यप्रणाली को लेकर कॉलेज शिक्षकों ने आपत्ति जताई है। आज सीटीए की तरफ से इसका विरोध जताया गया है। सीटीए की तऱफ से इसको लेकर बयान जारी किया गया है कि शिक्षा विभाग मनमाने तरीके से शिक्षकों के बड़े वर्ग को इस सातवें वेतनमान से वंचित कर रहा है। छठे वेतन आयोग में जहां पीएचडी और एमफिल की वेतन वृद्धि दी गई थी और जिसे मूल वेतन में जोड़ा जाना था, शिक्षा विभाग ने इन वेतन वृद्धियों को सातवें वेतनमान में समाप्त कर दिया है जो सरासर गलत है तथा UGC की अधिसूचना के खिलाफ है।

सीटीए के प्रधान डॉ. राजबीर सिंह ने बताया कि अतिरिक्त मुख्य सचिव वित्त विभाग हरियाणा सरकार द्वारा जारी क्रमांक संख्या 13/2(9)2013-5FR/19592 दिनांक एक अगस्त 2016 में यह कहा गया है की पीएचडी और एमफिल की वेतन वृद्धि या अलग से नहीं रखी जाएंगी तथा यह मूल वेतन का भाग होंगी। बावजूद इस पत्र के शिक्षा विभाग ने आज तक इस पर कोई कार्यवाही नहीं की है तथा इस पत्र को कॉलेजों में भेजा नहीं है जो कि सरासर गलत है।

डॉ. राजबीर सिंह ने बताया कि इसके अतिरिक्त पूर्व में किए गए पदोन्नति के मामलों को भी वापिस किया जा रहा है जिसके कारण शिक्षकों का वेतन बढ़ने की बजाय घट गया है। शिक्षा विभाग तथा मुख्यमंत्री हरियाणा को इस संबंध में कई बार लिखा जा चुका है परंतु हरियाणा सरकार सोई पड़ी है, सरकार व शिक्षा विभाग का आचरण पूरी तरह से गैर जिम्मेदाराना व संवेदनहीन है। यहां तक की 2006 से 2008 के बीच नियुक्त हुए शिक्षकों में भी असमानता रखी जा रही है।

उन्होने कहा कि शिक्षा विभाग द्वारा नियुक्त अधिकारी मनमाने तरीके से वेतनमान दे रहे हैं जिसका ना तो कोई आधार है और ना ही कोई दस्तावेज हैं। शिक्षा विभाग का ऐसा असंवेदनशील रवैया समझ से परे है तथा शिक्षक वर्ग न्यायालय की शरण में जाने को मजबूर है।
कॉलेज शिक्षकों ने सामूहिक तौर पर अपना रोष प्रकट करने के लिए आने वाले पूरे सप्ताह भर काले बिल्ले लगाने का फैसला लिया है ताकि सरकार नींद से जाग सके।

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