चार साल से गरीब बच्चों को पढ़ा रही 16 साल की अंजू, जिन बच्चों ने पहले छोड़ दिया था स्कूल

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Yuva Haryana,

Fatehabad, 13 Jan,2019

नोबेल पुरस्कार विजेता मलाला यूसुफजई जिन्होंने छोटी सी उम्र में ही बच्चों व महिला शिक्षा के हक को लेकर लड़ाई लड़ी व लोगों को जागरुक किया। ऐसे ही लोगों को शिक्षा के प्रति जागरुक कर रही है मात्र 16 साल की लड़की अंजू जिसे हरियाणा की मलाला का नाम दिया जाए तो वह गलत नहीं होगा।

अंजू हरियाणा के जिला फतेहाबाद के एक छोटे से गांव दौलतपुर की रहने वाली है। अंजू पिछले 4 वर्षों से अपने आस-पास के बच्चों को शिक्षा और हकों को दिलवाने के लिए संघर्ष कर रही है। जिसका परिणाम यह निकला है कि उसके गांव के लोग अब अपने बच्चों को खेतों में काम न करवा कर स्कूलों में पढऩे के लिए भेज रहे हैं।

अंजू खासकर ऐसे परिवारों को प्रेरित करती है, जिसमें मां-बाप अपने बच्चों खासकर लड़कियों को स्कूल नहीं भेजते हैं। अंजू उनको अपनी बातों और तर्कों से उनकी मानसिकता बदल कर उनके बच्चों को स्कूल ले जाती है।

अंजू मलिन बस्तियों में जाकर बच्चों को खुद पढ़ाती है। मलिन बस्तियों के बच्चों को एकत्र कर उन्हें तथा उनके अभिभावकों को प्रेरित कर शिक्षा का महत्व समझा रही है और खुद उनके बच्चों को मुफ्त में पढ़ा रही है।

वहीं इस मुहिम को शिखर पर ले जाने वाली अंजू ने बताया कि जब उन्होंने यह अभियान शुरू किया तो वह अपने घर से माता-पिता को यह कहकर जाती थी कि वह दोस्तों या रिश्तेदार के यहां जा रही है,  लेकिन वह लोगों को जागरूक करने के लिए अलग-अलग गांव व ढाणियों में जाती थी।

आज उसी मेहनत का फल है कि वह करीब 500 बच्चों को जो अपनी पढ़ाई बीच में छोड़ चुके थे, सभी का वह अपनी टीम के साथ मिलकर स्कूलों में दाखिला करवा चुकी है।

अब अंजू ने इस मुहिम को बुलंद उड़ान मुहिम का नाम दिया है और बुलंद उड़ान के नाम से अपनी संस्था बना ली है, जिसमें अलग-अलग गांव के लड़के-लड़कियों को अपने साथ जोड़ा। यही कारण है कि अब राजस्थान, पंजाब व हरियाणा में उनकी टीम ड्राप आउट बच्चों के भविष्य को संवारने में लगी हुई है।

अंजू नेशनल स्तर पर बनी संस्था अशोका यूथ वेलफेयर में भी सेलेक्ट हो चुकी है, जिसमें उन बच्चों को चुना जाता है जो कुछ अलग करने में लगे होते हैं। वहीं बुलंद उड़ान की टीम बच्चों के लिखने-पढऩे के लिए जो सामान चाहिए होता है उसे वे अपनी जेबखर्च से उपलब्ध कराते हैं।

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