“विधानसभा में भूत है, हवन करवाया जाए” राजस्थान विधानसभा में आजकल इस पर चर्चां है

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जिस विधानसभा में अंधविश्वास को खत्म करने के कानून बनते हैं, उसी में भूत-प्रेत और बुरी आत्माओं जैसी अंधविश्वास बढ़ाने वाली बातें अगर हो तो लोगों का सदन से विश्वास उठता है। और वो भी जब इसे खुद विधायकों ने शुरू की।

शुरुआत दोपहर करीब डेढ़ बजे हुई। सदन के बाहर मुख्य सचेतक कालूलाल गुर्जर और नागौर से बीजेपी विधायक हबीबुर्रहमान अशरफी ने मीडिया से कहा कि विधानसभा में बुरी आत्माओं का साया है। तभी तो आज तक सदन में 200 विधायक एक साथ नहीं रहे। कभी किसी की मौत हो जाती है, कभी किसी को जेल हो जाती है। यहां आत्माओं की शांति के लिए हवन और पंडितों को भोजन कराने की जरूरत है। वे इस बारे में मुख्यमंत्री को भी बता चुके हैं।

तभी विधायकों द्वारा फैलाया गया यह अंधविश्वास रात करीब 8 बजे सदन में गूंजने लगा। अनुदान मांगों के जवाब के बीच कांग्रेस के धीरज गुर्जर ने यह मसला उठाया और कहा कि आपके सचेतक और विधायक अंधविश्वास फैला रहे हैं। जिसके बाद बात बढ़ गई और कमेटी से भूत-प्रेतों की जांच कराने तक पहुंच गई। इस दौरान कभी ठहाके लगे तो कभी भूत-प्रेत की बातों को सिरे से खारिज भी किया गया।

बता दें कि नाथद्वारा से बीजेपी के विधायक कल्याण सिंह के देहांत के एक दिन बाद ही बीजेपी विधायकों का यह बयान सामने आया है कि विधानसभा के पीछे शमशान है।

जिसके बारे में मुख्य सचेतक कालूलाल गुर्जर ने कहा है कि जहां विधानसभा है, वहां श्मशान था। मृत बच्चे दफनाए जाते थे। हो सकता है कि कोई आत्मा हो, जिसे शांति न मिली हो। वह नुकसान पहुंचा रही हो। इसीलिए सदन में कभी एकसाथ 200 विधायक नहीं रहे।

वहीं बीजेपी विधायक हबीबुर्रहमान अशरफी ने कहा भारतीय संस्कृति में ऐसी मान्यता है कि श्मशान भूमि पर भवन नहीं होना चाहिए। ऐसे में विधानसभा के मामले में क्यों नहीं माना जाता सकता। क्या कारण है कि कभी एक साथ 200 विधायक नहीं बैठे। मैंने भी सीएम से इस बात को कहा है।

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