रणदीप सुरजेवाला का सरकार पर हमला, भ्रष्ट करने का भयंकर षड़यंत्र रचा जा रहा है अब

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Vinod Saini, Yuva Haryana
Hisar, 21 Sept, 2018

अखिल भारतीय कांग्रेस कोर कमेटी के सदस्य, राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी रणदीप सुरजेवाला ने गुरु जम्भेश्वर यूनिवर्सिटी में छात्र संवाद “सोच से सोच की लड़ाई” में छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि व्यक्ति की सोच, विचारधारा, चिंतन ये जिंदगी का वो रास्ता है जिनके बगैर जीवन असम्भव है। बहुत से लोग ये समझ सकते हैं कि रुपया पैसा, धन दौलत, ताकत, बल वो मापदंड हैं देश और प्रदेश को आगे ले जाने में। कोई भी देश, राष्ट्र समाज तभी आगे बढ़ सकता है जब उनकी सोच, दृष्टि, रास्ता, चिंतन वो सही मार्ग पर चल रहा हो।

आज उसे भ्रष्ट करने का एक भयंकर षडयंत्र किया जा रहा है। आप सबका दिमाग फ्रेश करने के लिए आपको अपने बारे में, अपने परिवार के बारे में, अपने जिले, इलाके के बारे में ये सोचना है कि जो लोग अब युवाओं को पकौड़े तलवाने, पान बेचने या नाली से गैस बनवाकर रोजगार पैदा करने की बात करते हैं। किस तरह के प्रधानमंत्री देश के नेता होते हैं।

आज भारत की सबसे बड़ी चुनौती एजुकेशनल आपरेटर और स्ट्रक्चर की है जिसे तोड़ा जा रहा है। जो यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन बनाया गया था आज उसे हायर एजुकेशन कमीशन फंडिंग बना दिया गया है। सुरजेवाला ने कहा कि 4 बातें जो मोदी सरकार को शिक्षा स्तर पर संदेह के घेरे में खड़ा करती हैं। उन्होंने कहा कि 4 साल में भाजपा सरकार एजुकेशन सेस से 1लाख 60 हजार 786 करोड़ रु इकट्टे कर चुकी है लेकिन वो गया कहां? यूजीसी के बजट को 9 हजार करोड़ रु से 4722 करोड़ रु यानि 50 प्रतिशत कम कर दिया। यूजीसी द्वारा कॉलेजों को दिया जाने वाला पैसा 100 प्रतिशत से 70 प्रतिशत कर दिया। यूजीसी को ही रद्द कर दिया।

सुरजेवाला ने कहा कि जिस देश के प्रधानमंत्री और शिक्षामंत्री को यही नही पता कि वो खुद कितना पढ़ें हैं तो इस देश को शिक्षा स्तर पर कैसे आगे बढ़ा सकते हैं। हम ये नही कहते कि कांग्रेस सब ठीक कर दे लेकिन हमारे पास एक सोच है, इच्छा है, प्रयास है हमारे नेता राहुल गांधी की एक सोच है कि जब तक हम शिक्षा के तंत्र, रोजगार के तंत्र को नही बदलेंगे तब तक शिक्षा स्तर को और ज्यादा बेहतर नही बनाया जा सकता।
एक छात्रा द्वारा पूछे गए सवाल कांग्रेस सरकार बनते ही आपकी शिक्षा नीति क्या होगी?

सुरजेवाला ने शिक्षा के मुद्दों पर चर्चा करते हुए कहा कि सरकार और प्रशासन को ये मानना पडेगा कि वो स्कूल हो, कॉलेज हो या युनिवर्सिटी हो निजी शिक्षण संस्थान भी बराबर से बढ़कर शिक्षा के प्रचार और प्रसार में भागीदार हैं। इसलिए शिक्षा का बजट जिसे सरकार केवल और केवल सरकारी संस्थाओं तक ही सीमित कर देती है तो हमें उसमें कई बार आश्चर्य होता है जैसे जब कोई निजी शिक्षण संस्थान लगभग 850 बेटे व बेटियों को बेहतरीन शिक्षा दे सकता है तो क्यों नहीं सरकार के एक बजट का हिस्सा उन्हें मिल सकता ! ऐसी संस्था जो एक व्यक्ति द्वारा मलकियत ना होकर बल्कि किसी ट्रस्ट द्वारा नो प्रॉफिट नो लोस पर चलाई जाती है ऐसी संस्थाओं को सरकार के एक बजट का हिस्सा जरुर दे देना चाहिए।

सुरजेवाला ने कहा कि बहुत सारे लोग हैं, बहुत सारी संस्थाएं हैं, बहुत सारे समूह हैं और बहुत सारे परिवार हैं जो शिक्षा को बढ़ावा देना चाहते हैं। उनमें से अगर कोई संस्था या समूह नो प्रॉफिट नो लोस पर कॉलेज खोलना चाहते हैं तो हम ये मानते हैं कि सरकार की ओर स उसी संस्था की प्रोपर्टी को अपनी निगरानी के तहत करकर 4 प्रतिशत ब्याज पर उनको कम से कम आधी राशि कंस्ट्रकशन के लिए दे देनी चाहिए और जिसको एजुकेशन इन्फास्ट्रक्चर कोर्पस से कम से कम 2 हजार करोड़ रुपये सालाना बनाने की हमें जरुरत है।

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