हुड्डा के गढ़ में गरजेंगे धुरधंर विरोधी राव इंद्रजीत, 15 जुलाई को जाटलैंड में करेंगे रैली

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Sahab Ram, Yuva Haryana
Chandigarh, 11 July, 2018

हरियाणा में जैसे जैसे लोकसभा और विधानसभा के चुनावों का समय नजदीक आ रहा है, वैसे वैसे प्रदेश में राजनैतिक हलचल तेज हो रही है। एक तरफ जहां बीजेपी, कांग्रेस और इनेलो-बीएसपी के नेता मैदान में डटे हुए हैं तो वहीं कई बड़े दिग्गज नेता भी मैदान में उतर आए हैं।

इधर दक्षिण हरियाणा और अहीरवाल की राजनीति करने वाले केंद्रीय राज्यमंत्री राव इंद्रजीत सिंह अब जाटलैंड में रैली करने जा रहे हैं। यह भूपेंद्र सिंह हुड्डा के गढ़ झज्जर के मुंडाहेड़ा में 15 जुलाई को रैली है।

इससे पहले उन्होने महेंद्रगढ़ के दोगला अहीर में रैली कर अपना शक्ति प्रदर्शन किया था वहीं अब वो जाटलैंड में भी अपनी ताकत विरोधियों को दिखाना चाहते हैं। वहीं बताया जा रहा है कि वो जल्द ही उत्तर हरियाणा में भी रैली कर सकते हैं।

कांग्रेस सरकार के दौरान भूपेंद्र सिंह हुड्डा और राव इंद्रजीत सिंह के बीच अनबन चलती रही, वो गुरुग्राम से सांसद थे और भूपेंद्र सिंह हुड्डा उस वक्त मुख्यमंत्री थे, दोनों के बीच आपसी खटास की वजह से राव इंद्रजीत सिंह ने चुनाव से पहले कांग्रेस छोड़कर बीजेपी ज्वाइन कर ली थी।

बीजेपी ने मौका देखते हुए राव इंद्रजीत सिंह को लोकसभा चुनाव लड़वाया था और राव इंद्रजीत सिंह जीतकर संसद चले गए। इतना ही नहीं केंद्र सरकार ने राव इंद्रजीत को केंद्रीय राज्यमंत्री का पद भी दिया।

राव साहब सन 1977 में पहली बार विधायक बने थे, यानि वो लगभग 50 साल से सक्रिय राजनीति में हैं। उनके पिता राव बिरेन्द्र सिंह हरियाणा के मुख्यमंत्री रहे, ये 1857 की क्रांति के एक नायक राव तुलाराम के वंशज हैं।

उनकी बेटी आरती राव भी पिछले कई सालों से सक्रिय राजनीति में हैं, उनकी बेटी इंसाफ मंच को चलाती है, साथ ही अपने पिता का भी हाथ बंटाती है।

राव इंद्रजीत सिंह का राजनीतिक सफर

राव इंद्रजीत सिंह पहली बार 1977 में विधायक बने थे, इसके बाद भी वो तीन बार विधायक रहें।
1982-87 तक वो हरियाणा सरकार में मंत्री भी रहे।

1998 में वो महेंद्रगढ़ लोकसभा में सांसद चुने गए

2004 में वो महेंद्रगढ़ लोकसभा में सांसद चुने गए

2009 में वो गुड़गांव लोकसभा में कांग्रेस की तरफ से सांसद चुने गए

2014 में वो गुड़गांव लोकसभा से बीजेपी की तरफ से सांसद बने

1991 से 1996 तक कैबिनेट में पर्यावरण, वन, चिकित्सा और तकनीकी शिक्षा मंत्री भी रहे।

2004-2006 तक वो केंद्रीय विदेश मामले के राज्यमंत्री के तौर पर रहे।

2009 तक उन्होने संसदीय सूचना प्रौद्योगिकी समिति की अध्यक्षता की।

2014 में नरेंद्र मोदी सरकार में केद्रीय रक्षा राज्यमंत्री बने।

हांलाकि दूसरी तरफ उनके ही भतीजे और राव अजीत सिंह के बेटे राव अर्जुन सिंह लगातार उनपर हमलावर हो रहे हैं। राव अर्जुन सिंह कई सभाओं में कह चुके हैं कि राव इंद्रजीत सिंह चार साल तक तो बोलते नहीं और आखिरी साल में जनता के सामने जाकर बोलते हैं कि मेरी कोई सुनता नहीं है। ऐसे में अब राव अर्जुन सिंह अपने पिता राव अजीत सिंह की दावेदारी कांग्रेस की तरफ से गुरुग्राम लोकसभा क्षेत्र में पक्की कर रहे हैं।

 

 

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