अहीरवाल गढ़ में राव इंद्रजीत का शक्ति प्रदर्शन, क्या है रैली के राजनीतिक मायने ?

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Anil Arya, Edited By Sahab Ram, Yuva Haryana
Chandigarh, 6 May, 2018

कांग्रेस में सम्मान ना मिल पाने या तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेन्द्र हूड्डा की राजनीति का शिकार होकर, लगभग 5 साल पहले राव इंद्रजीत सिंह ने भारतीय जनता पार्टी का दामन थामा था।

हरियाणा की अहीर राजनीति के संदर्भ में यह सबसे बड़ा दलबदल कहा जा सकता है, हांलाकि चौ बीरेन्द्र सिंह का पाला बदलना भी बडी घटना थी, जिसने मोदी की हवा को हरियाणा विधानसभा चुनाव में तूफान बना दिया।

राव साहब सन् 1977 में पहली बार विधायक बने थे, यानि वो लगभग 50 साल से सक्रिय राजनीति में हैं। उनके पिता राव बिरेन्द्र सिंह हरियाणा के मुख्यमंत्री रहे, ये 1857 की क्रांति के एक नायक राव तुलाराम के वंशज हैं।

मेरी नजर में अब तक अहीरवाल की राजनीति रामपूरा हाउस वर्सिज आल की रही है। खैर मौजूदा हालात पर बात करते हैं, आज प्रधानमंत्री मोदी की हालत 2014 के मनमोहन सिंह वाली तो नहीं है, लेकिन उनसे करिश्मे वाली उम्मीद भी बेमानी है, वे भी लोगों की उम्मीदों पर खरें नहीं उतरे हैं।

कोई विकल्प ना होने से राष्ट्रीय स्तर पर मोदी मजबूत नजर आते हैं, लेकिन हरियाणा के हालात जूदा हैं। जाट लैंड में भाजपा का सफाया तय है, इनेलो-बसपा समझौते के बाद भाजपा शहरी सीटों पर ही आगे नजर आती है। इन हालात में अहीरवाल की 12-14 सीटें बहुत महत्वपूर्ण हो जाती हैं, जहां राव इन्द्रजीत का सिक्का चलता रहा है और वे भी अपनी बेटी आरती राव के माध्यम से इंसाफ मंच को 2014 से जिंदा रखे हुए हैं। अब चुनावों के नजदीक एक बार फिर वे उसी इंसाफ मंच से कोई बड़ा ऐलान दौंगड़ा अहीर की रैली से कर सकते हैं।

नारनौल से विधायक ओमप्रकाश इस रैली के लिए प्रचार में जुटे हुए हैं। इनके अलावा जनस्वास्थ्य मंत्री ने भी रैली के लिए दौरा किया है बताया जाता है।

दौंगड़ा अहीर की रैली के लिए बड़े स्तर पर प्रबंध किए गए हैं। इस रैली से राव साहब के संभावित कदम पर बड़ी-बड़ी पोस्ट सोशल मीडिया पर शेयर हो रही हैं। जिनमें अलग-अलग कयास भी लगाए जा रहे हैं।

जिसमें बसपा-इनेलो गठबंधन में शामिल होने, नया दल बनाने या आरती राव को अटेली विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ाकर उपमुख्यमंत्री बनाने की योजना बताई जा रही है। इन्हीं पोस्टों में राव इंद्रजीत सिंह के भी भिवानी-महेंद्रगढ़ लोकसभा सीट से चुनाव लडने की संभावना जताई जा रही है।

कार्यकर्ताओं की पोस्टों से अंदाजा है लगाया जा रहा है कि राव साहब बीजेपी को अलविदा कहने का मन बना चुके हैं। दौंगड़ा अहीर रैली के प्रचार में भाजपा के झंडे, बैनर-फ्लैक्स पर बीजेपी के राष्ट्रीय नेताओं की फोटो न के बराबर होने को इसका संकेत माना जा सकता है, हालांकि इन्द्रजीत ने जो पोस्ट खुद शेयर की है, उसमें प्रधानमंत्री मोदी व अमित शाह की तस्वीरें हैं।

आज होने वाली दौंगड़ा अहीर की रैली, इन सब कयासों का जबाब होगी कि, राव साहब भाजपा से मोलभाव कर रहे हैं या कोई अन्य विकल्प तलाश रहे हैं।
अनिल आर्य भनवाला
राजनैतिक विश्लेषक
9467793049

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